Republic Day: मिलकर जीता 1971 का युद्ध, अब साथ में बांग्लादेश की सेना ने किया भारतीय सेना के साथ मार्च

Republic Day: गणतंत्र दिवस की परेड के मौके पर आज बांग्लादेश की सेना के जवानों की भी एक टुकड़ी ने दिल्ली के राजपथ पर परेड मार्च में हिस्सा लिया। यह यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा है कि पाकिस्तान से आजाद हुए बांग्लादेश को 50 साल पूरे हो गए हैं। बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका काफी निर्णायक थी। देश के इतिहास में भारतीय सेना की पाकिस्तान के खिलाफ 1971 में जीत को ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जाता है, 50 साल पहले पाकिस्तान की सेना के तकरीबन 90 हजार सैनिकों ने भारत की सेना के सामने हथियार डाल दिए थे। भारत और बांग्लादेश ने एक साथ मिलकर 1971 का युद्ध लड़ा और जबरदस्त जीत दर्ज की। इस जीत के 50 साल पूरे होने के मौके पर बांग्लादेश की सेना ने भारतीय सेना के साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर मार्च किया।

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    भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर एक अलग देश बना था। 14 दिन तक चले इस युद्ध के बाद पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। शायद यह दुनिया का सबसे बड़ा आत्मसमर्पथ था। इस युद्ध को जीते 50 साल हो गए हैं और भारत व बांग्लादेश मिलकर एक साथ इस जीत की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इसी मौके पर बांग्लादेश की सेना के 122 जवानों की टुकड़ी ने राजपथ पर मार्च किया।

    50 साल पहले एक युवा देश बांग्लादेश का जन्म हुआ था। इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश को आजादी मिली, इसके साथ ही दो देशों के सिद्धांत का भी 50 साल पहले अंत हो गया था। आज भी इस युद्ध में अपनी शर्मनाक हार के घाव को पाकिस्तान भूल नहीं पाया है। 1971 के युद्ध में भारत और बांग्लादेश की सेनाओं की वीरता की कहानी को कोई भुला नहीं सकता है। भारतीय सेना और बांग्लादेशी मुक्ति वाहिनी ने अदम्य साहस के साथ इस युद्ध को लड़ा। भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की सेना ने लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी के नेतृत्व में भारतीय लेफ्टिनेंट जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था।

    जब पाकिस्तान की सेना ने भारत के सामने आत्मसमर्पण किया तो उसे इस बाद का भरोसा था कि भारतीय सेना उसके साथ अच्छा बर्ताव करेगी और जेनेवा कंवेंशन के तहत युद्ध कैदियों के साथ सही बर्ताव होगा। जबतक पाकिस्तान की सेना ने सरेंडर नहीं किया मुक्ति योद्धा ढाका की सीमा पर डटे रहे। बहरहाल पिछले 50 साल में बांग्लादेश ने विकास की एक नई ऊंचाइयों को छुआ है। कई क्षेत्रों में बांग्लादेश पाकिस्तान से आगे निकल गया है।

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