इतिहास के पन्नों से- मियां हकीम साहब के ईद मिलन में चलेंगे
नई दिल्ली ( विवेक शुक्ला) अगर आप खाटी दिल्ली वाले हैं तो आप हकीम अब्दुल हामिद साहब के ईद मिलन में जरूर गए होंगे या उसके बारे में सुना होगा।हकीम साहब हमदर्द दवाखाना के संस्थापक थे। उन्हीं की कंपनी बनाती है रूहफजा शर्बत।

भव्य ईद मिलन
हकीम साहब के राजधानी के चाणक्यपुरी स्थित दौलतखाने में ईद के रोज शाम को ईद मिलन का आयोजन होता है। इसमें दिल्ली वाले बड़ी तादाद में पहुंचते हैं। तमाम देशों के राजदूतों के अलावा देश के चोटी के नेता, कवि, शायर और आम आदमी के लिए हकीम साहब के दरवाजे खुले होते हैं। सब एक-दूसरे से गले मिलते हैं।
लजीज व्यंजन
ईद मिलन में लाजवाब शर्बत के साथ-साथ लजीज सामिष तथा निरामिष व्यंजनों के साथ मिठाई का भी आ लुत्फ ले सकते हैं। हकीम साहब पक्के दिल्ली वाले थे। उन्होंने अपने घऱ में ईद मिलन तथा होली मिलन की रिवायत करीब 60 साल पहले शुरू की थी। सारी दिल्ली उन्हें बेहद अदब की निगाहों से देखती थी।
बड़े शिक्षाविद्
उन्होंने ही राजधानी में जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी स्थापित की। उसमें हजारों बच्चे पढ़ते हैं। कुछ लोग तो उन्हें नए दौर का सर सैयद अहमद भी कहते हैं, जिन्होंने अलीगढ़ मस्लिम यूनिवर्सिटी स्थापित की थी।
कीम साहब का तो साल 2001 में इंतकाल हो गया था, पर उसके बाद भी उनके घर में ईद मिलन का सिलसिला जारी रहा। उनके परिवार वाले हकीम साहब की तरफ से शुरू की गई परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।
एक दौर में शरद पवार. राजेश पायलट, लाल कृष्ण आडवाणी, वी.सी.शुक्ल, खुशवंत सिंह, कुलदीप नैयर, शीला दीक्षित सरीखी हस्तियां हकीम साहब के ईद मिलन में शिरकत करना ख्र महसूस करती थीं।
कद्रदान उर्दू के
हकीम साहब उर्दू भाषा के बहुत बड़े कद्दान थे। उन्होंने ही चचा गालिब की मजार को नए सिरे से सुंदर बनवाया था।
करते खुद फोन
हकीम साहब ईद मिलन तथा होली मिलन के लिए अपने चाहने वालों को खुद फोन करके या निमंत्रण भेज कर बुलाते थे। हर आने वाले से वे जरूर मिलते थे ताकि किसी को ये ना लगे कि वे उन्हे पूछ नहीं रहे।












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