'काश ये आज की पोस्ट होती', रतन टाटा का आखिरी पोस्ट हुआ वायरल
दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं है, उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में बुधवार को आखिरी सांस ली। रतन टाटा के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। ऐसा पहली बार नहीं है जब रतन टाटा बीमार हुए, लेकिन इस बार ईश्वर की मर्जी कुछ और ही थी। इससे पहले जब रतन टाटा के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर खबर वायरल हुई थी तो खुद रतन टाटा ने अपने स्वास्थ्य के बारे में अपडेट दी थी और कहा था कि वह स्वस्थ्य हैं।
सोशल मीडिया पर रतन टाटा का आखिरी पोस्ट उनके निधन के बाद फिर से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में रतन टाटा ने अपने स्वास्थ्य को लेकर चल रही अफवाहों का खंडन करते हुए लोगों को इस तरह की रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं करने को कहा था।

रतन टाटा का आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमे उन्होंने लिखा था, मैं इस बात से अवगत हूं कि हाल में मेरे स्वास्थ्य को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है, मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि यह दावे निराधार हैं। मैं फिलहाल अपनी उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मेडिकल चेकअप से गुजर रहा हूं।
चिंता की कोई वजह नहीं है। मैं अच्छा हूं और आप सभी लोगों और मीडिया से अपील करता हूं कि इस तरह की गलत जानकारी फैलाने से बचें।
बड़ी संख्या में लोग रतन टाटा के इस आखिरी इंस्टा पोस्ट को शेयर कर रहे हैं और दुख जाहिर कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि काश यह पोस्ट एक बार फिर से रतन टाटा करते और अपने निधन की खबरों को अफवाह करार देते हुए इसका खंडन करते, लेकिन दुख की बात यह है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं।
प्रतिष्ठित टाटा परिवार का हिस्सा
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ। उनके माता-पिता का नाम नवल टाटा और सोनू टाटा था। उनका परिवार भारत के प्रतिष्ठित टाटा परिवार से संबंधित है, जिसे जमशेदजी टाटा ने स्थापित किया था।
रतन टाटा की शिक्षा मुंबई के कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल और अमेरिका में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में हुई। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से भी पढ़ाई की।
कई बड़ी उपलब्धियां
रतन टाटा 1991 में टाटा समूह के चेयरमैन बने। उनके कार्यकाल के दौरान, टाटा समूह ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी सफलताएं हासिल कीं। जिसमे टेटली चाय, जैगुआर, कोरस का अधिग्रहण शामिल है।
रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा समूह ने टाटा इंडिका और टाटा नैनो जैसी क्रांतिकारी कारें भी लॉन्च कीं, जो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में मील का पत्थर साबित हुईं। टाटा नैनो, जिसे "दुनिया की सबसे सस्ती कार" के रूप में पेश किया गया, उनकी दूरदर्शी सोच का प्रतीक है।












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