सवर्णों को 15 फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए- राम विलास पासवान
नई दिल्ली। पिछले दिनों जिस तरह से सवर्णों ने भारत बंद किया था, उसके बाद केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की बात कही है। पासवान से जब पूछा गया कि क्या सवर्णों को कुछ आरक्षण दिया जाना चाहिए तो उन्होंने कहा कि कुछ क्यों उन्हें 15 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कुल 69 फीसदी आरक्षण है, ऐसे में अगर सभी राजनीतिक दल फैसला लेते हैं तो कोई दिक्कत नहीं होगी, अधिकतम 50 फीसदी के आरक्षण की सीमा कोई दिक्कत नहीं होगी। पासवान ने कहा कि भाजपा कभी भी सवर्णों के खिलाफ नहीं हो सकती है, सवर्ण पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं और वह पार्टी के प्राकृतिक समर्थक हैं।

वीपी सिंह और मोदी ने अंबेडकर को उनका सही सम्मान दिया
कुछ महीने पहले दलितों ने भी मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन किया था, लेकिन इस प्रदर्शन पर पासवान का कहना है कि छह महीने पहले हमारे खिलाफ बहुत प्रदर्शन हुआ, मंत्रियों के लिए आगे बढ़ पाना मुश्किल हो रहा था, मोदी सरकार को दलित विरोधी और पिछड़ा विरोधी कहा जा रहा था। लोग मुझसे पूछते थे कि आप तो दलितों के चैंपियन हैं, आप शांत क्यों हैं। दलितों और पिछड़ा वर्ग के लिए बहुत काम किया गया है, लेकिन लोगों के भीतर ऐसी सोच को आगे बढ़ाया गया था कि दलितों, पिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया गया है। लेकिन अब यह सोच बदल चुकी है, मैं हमेशा यह कहता हूं कि वीपी सिंह और नरेंद्र मोदी ने ही बीआर अंबेडकर को उनका सही सम्मान दिया है।

सरकार ने दिखाया कैसे बदली जाती है सोच
पासवान ने कहा कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने एसएसी/एसटी एक्ट पर फैसला दिया था, उसके बाद यह सरकार की असल परीक्षा थी, युवा सड़क पर थे, ऐसे में अगर अध्यादेश नहीं लाया गया होता तो स्थिति बिगड़ सकती थी। हमने कमेटी का गठन किया जिसकी अध्यक्षता राजनाथ सिंह कर रहे थे और फैसला लिया कि तत्काल प्रभाव से इसके खिलाफ अध्यादेश लाया जाएगा। लेकिन ब्यूरोक्रेसी की अपनी रफ्तार होती है, जो भी हुआ अच्छे के लिए हुआ, अगर लोगों ने प्रदर्शन नहीं किया होता तो लोगों को पता नहीं चलता कि मोदी सरकार ने उनके लिए क्या किया।

मोदी दलित विरोधी नहीं
मोदी सरकार दलित विरोधी नहीं है, लेकिन इस तरह की सोच को आगे बढ़ाया जा रहा था कि मोदी सरकार दलित विरोधी है। मैंने पहले भी कहा था कि वीपी सिंह क्षत्रिय थे, जब वह लोगों की सोच को बदल सकते हैं तो मोदी ना तो कोई धनाढ्य परिवार से आते हैं और ना ही सवर्ण जाति के हैं। ऐसे में ना सिर्फ लोगों कि विचारधारा बदली बल्कि लोग यह कहने लगे हैं कि हम सवर्ण विरोधी हैं। राहुल गांधी मानसरोवर गए थे, तो वो एक बार कहें कि एससी/एसटी एक्ट में बदलाव गलत है।
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