जानिए कितने साल बाद अयोध्या पहुंचे पीएम मोदी

नई दिल्ली। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की आज से शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण से पहले भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होंगे। भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पीएम मोदी अयोध्या पहुंच चुके हैं। अहम बात यह है कि पीएम मोदी 29 साल के बाद अयोध्या पहुंचे हैं। यही नहीं रामजन्मभूमि जाने वाले नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री भी बन गए हैं। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए सौंपने का आदेश दिया था, जिसके बाद आज मंदिर के भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पीएम मोदी अयोध्या पहुंचे हैं। पीएम मोदी सुनहरे रंग के कुर्ते और सफेद रंग की धोती में यहां पहुंचे। भूमि पूजन के दौरान पीएम मोदी 40 किलोग्राम की चांदी की ईंट से मंदिर की नींव रखेंगे।

तभी अयोध्या आऊंगा, जब मंदिर बन जाएगा

तभी अयोध्या आऊंगा, जब मंदिर बन जाएगा

आखिरी बार प्रधानमंत्री मोदी 29 वर्ष पहले अयोध्या गए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार अयोध्या पहुंचे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान जब नरेंद्र मोदी से एक पत्रकार ने पूछा था कि आप दोबारा अयोध्या कब आएंगे तो उन्होंने कहा था कि अब वह मंदिर बनने के बाद ही यहां आएंगे। उस वक्त नरेंद्र मोदी बतौर भाजपा नेता के तौर पर अयोध्या गए थे और आज वह देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे।

खुद मंदिर आंदोलन के संचालक रह चुके हैं पीएम

खुद मंदिर आंदोलन के संचालक रह चुके हैं पीएम

अहम बात यह है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के पक्ष में राष्ट्रीय अभियान के संचालक रह चुके हैं। मंदिर के लिए खुद पीएम मोदी अभियान में हिस्सा ले चुके हैं। ऐसे में आज खुद पीएम मोदी 16वीं शताब्दी में बनी बाबीर मस्जिद स्थल पर राम मंदिर निर्माम की नींव रखेंगे और यहां मंदिर का भूमि पूजन करेंगे। बता दें कि राम मंदिर का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी अहम रहा है, इस मुद्दे ने पार्टी को पूरे देश में खड़ा किया और चुनाव में एक बड़ी जीत हासिल कराने में अहम भूमिका निभाई।

मंदिर आंदोलन की शुरुआत

मंदिर आंदोलन की शुरुआत

गौरतलब है कि राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत 1990 में हुई थी जब लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर के पक्ष में रथ यात्रा लेकर निकले थे। इस रथ यात्रा का मुख्य मकसद राम मंदिर का निर्माण कराना था। जिसके बाद 6 दिसंबर को बड़ी संख्या में अयोध्या में जमा हुए कारसेवकों ने गिरा दिया था। इनका मानना था कि यह मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। 1992 में हुए दंगों में तकरीबन 2000 लोगों की मौत हुई थी। यह मसला कोर्ट में काफी वर्षों तक चला, जिसके बाद आखिरकार पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया।

175 गणमान्य आमंत्रित

175 गणमान्य आमंत्रित

गौरतलब है कि भूमि पूजन के कार्यक्रम में पीएम मोदी के अलावा 175 प्रतिष्ठित अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें 36 आध्यात्मिक परंपराओं से संबंध रखने वाले 135 पूज्य संत भी शामिल हैं, यही नहीं इस कार्यक्रम के लिए नेपाल से हिंदू संतों को भी आमंत्रित किया गया है। भूमि पूजन में अशोक सिंघल के परिवार से महेश भागचंदका और पवन सिंघल मुख्य यजमान होंगे तो वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के मुताबिक मंच पर पीएम मोदी के अलावा चार ही लोग होंगे, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल हैं। राय के मुताबिक सभी अतिथियों को जो निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं, उसमें सिक्योरिटी कोड लगा हुआ है। अगर कोई भी मेहमान रामजन्मूभूमि से कार्यक्रम के बीच से निकलता है, तो उसे दोबारा एंट्री नहीं मिलेगी।

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