जाने दीजिए....रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का किरण बेदी को लेकर विपक्ष से अपील
नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को विपक्ष, खासकर डीएमके से अपील की है कि पुडुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी के एक ट्वीट से पैदा हुए विवाद को आगे और न बढ़ाएं। उन्होंने विपक्ष को यह समझाने की भी कोशिश की है कि खुद बेदी ने उस ट्वीट को हटा लिया है और उसके लिए गहरा अफसोस भी जता चुकी हैं, तो इसे आगे खींचने का कोई मतलब नहीं है।

किरण बेदी के मसले पर राजनाथ का जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में तब इस मसले पर विपक्ष से विवाद न बढ़ाने की अपील की, जब डीएमके नेता टीआर बालू ने लगातार दूसरे दिन भी इसे उठाते हुए इसे तमिल समाज और प्रदेश के नेताओं का अपमान बताया। राजनाथ ने कहा कि बालू द्वारा मुद्दा उठाने के बाद गृहमंत्रालय ने इसपर संज्ञान ले लिया है और इसपर जरूरी कार्रवाई भी की है। राजनाथ सिंह ने कहा कि बेदी ने जो भी लिखा वो निजी तौर पर लिखा और उन्हें लगा कि इसे टाला जा सकता था, इसलिए उन्होंने उसे हटा भी लिया। उन्होंने ये भी कहा है कि उनके मन में तमिलनाडु की जनता का उतना ही सम्मान है, जितना पुडुचेरी के लोगों का है। आखिरकार रक्षा मंत्री ने सदन से कहा कि, "क्योंकि उन्होंने माफी मांग ली है और विश्वास दिलाया है कि फिर ऐसी घटना नहीं होगी, इसलिए हम इसे यहीं पर खत्म कर दें। "
डीएमके उठा रही थी मुद्दा
इससे पहले शून्य काल में डीएमके नेता टीआर बालू ने कहा था कि लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा ट्विटर पर किए गए कमेंट से तमिलनाडु में काफी नाराजगी पैदा हुई। हालांकि, डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने इस मुद्दे पर राजनाथ सिंह को उनके जवाब के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार विपक्ष की आवाज को भी इसी भावना से लेगी। हालांकि, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी राजनाथ सिंह के जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने किरण बेदी के खिलाफ सदन से एक प्रस्ताव पास करने की मांग की। जबकि, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संवैधानिक प्रमुख कोई निजी राय नहीं जाहिर कर सकता। लेकिन, स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही को अगले विषय की ओर बढ़ा दिया।

विवाद क्या हुआ था
दरअसल, सारा विवाद किरण बेदी के हटाए जा चुके उस ट्वीट से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु खासकर चेन्नई में पैदा हुई पानी की समस्या के लिए वहां की सरकार और भ्रष्ट राजनीतिज्ञों पर निशाना साधने की कोशिश की थी। अपने ट्वीट में पुडुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर ने जल संकट के लिए, "खराब शासन, भ्रष्ट राजनीति, उदासीन अफसरशाही के साथ बहुत ज्यादा स्वार्थी और लोगों के कायर रवैये " को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन, वो तमिलनाडु से सटे पुडुचेरी की उपराज्यपाल हैं, इसलिए उनका ये बयान बहुत बड़े विवाद की वजह बन गया और आखिरकार उन्हें इसे हटाकर माफी मांगनी पड़ गई।












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