चोट तो गहरी लगी है गृहमंत्री राजनाथ सिंह को
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। जिस किसी ने भी कल गृहमंत्री राजनाथ सिंह की प्रेस कांफ्रेस को देखा, उसने महसूस किया कि उन्हें चोटी बहुत गहरी लगी है। उन्होंने अपने पुत्र पंकज का बचाव करते हुए कहा कि वे राजनीति को ठोकर मार कर घर बैठ जाएंगे। इस बात से इतना साफ है कि चोट बहुत गहरी है।

वरिष्ठ राजनीतिक समीक्षक अरुण दीक्षित कहते हैं,राजनाथ सिंह के इस बयान के साथ यदि हम कुछ साल पहले के उस घटनाक्रम को याद करें जो भरी सभा में उमा भारती के साथ हुआ था। फर्क सिर्फ इतना है कि तब सच बोलने बाली उमा का साथ किसी ने नहीं दिया था। राजनाथ भी मौन रहे थे। उमा को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। जानकार कहते हैं कि अच्छी बात यह है कि नरेन्द्र मोदी राजनाथ के साथ खड़े हैं। लेकिन क्या बे उन लोगों के खिलाफ कोई कदम उठाने की हिम्मत करेंगे जो पार्टी में इस तरह के षड्यंत्र करते हैं ?
इस बात का है बड़ा अफसोस
बहरहाल, इतना साफ है कि राजनाथ सिंह को सच में चोट बहुत गहरी है। यदि गहरी न होती तो बाहर आकर यूँ ही गुबार नहीं फटता. वैसे तो वे कई मर्तबा चुप्पी साध लेते थे लेकिन आज ज़रूर कोई बड़ी बात ऐसी चुभी कि उनका सब्र का बांध फूट ही पड़ा।
भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर करीबी नजर रखने वाले कुछ जानकार कह रहे हैं कि यह अफसोस जनक बात है कि राजनाथ सिंह जैसे साफ छवि वाले शख्स को सफ़ाई देनी पड़ी। अब पंकज वाली ख़बर सही है या अफ़वाह, इससे क्या फ़र्क पड़ता है। बाप तो घुटने पर आ ही गए!
वैसे कहने वाले कह रहे हैं कि अकेले पंकज ही नहीं, राजनाथ के सैकड़ों स्वयंभू भतीजे भी आजकल बड़े सक्रिय हैं और गृह मंत्रालय के काम के नाम पर कुछ काटने की फि़राक़ में हैं। किसी ने अपनी फेस बुक पोस्ट में लिखा, राजनाथ की हालत इस समय कमलेश्वरजी जैसी है। उनके भी कई स्वयंभू भतीजे उनके जिंदा रहते मीडिया में उनके नाम पर डील करते फिरते थे। सुना था कि पुत्रमोह बहुत बुरी चीज़ है। बेटों को कहीं का नहीं छोड़ता और पिताओं को खा जाता है। जो बचता है, वह भतीजे निगल लेते हैं।












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