जानिए पिज्जा और आइसक्रीम खाने के लिये क्या-क्या कर जाते थे राजीव गांधी?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर आपने भी उन्हें आज एक बार जरूर याद किया होगा। खैर उनके जीवन से तो हर कोई परिचित है, लिहाजा अगर हम आज फिर से उनके जीवनसफर पर चर्चा करेंगे तो आप बोर होने लगेंगे।
खैर आप आइसक्रीम तो जरूर खाते होंगे, कभी-कभी पिज्जा भी। आइसक्रीम खाने के लिये बाहर निकल जाते होंगे और पिज्जा के लिये झट से ऑनलाइन ऑर्डर!!! पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी इन दोनों चीजों के लिये क्या करते थे, आप जानना चाहेंगे क्या?
तो चलिये हम आपको ले चलते हैं दिल्ली के इंडिया गेट पर जहां आइसक्रीम के ठेले वर्षों से लगते आ रहे हैं। हो सकता है कि आइसक्रीम बेचने वालों को मालूम न हो कि आज राजीव गांधी की जयंती है। हां, उनमें से कुछ को अब भी याद है कि वे जब तक प्रधानमंत्री नहीं बने थे, तब तक लगातार वे इंडिया गेट पर पत्नी सोनिया गांधी और बच्चों के साथ रात के वक्त आइसक्रीम खाने लिए आते थे।
वनीला फ्लेवर था राजीव गांधी का फेवरेट
राम लुभाया लंबे अरसे से इंडिया गेट पर आइसक्रीम बेच रहे हैं। वे बताते हैं कि राजीव गांधी लगातार उनके पास आइसक्रीम का मजा लेने आते थे अपनी फिएट कार में। पत्नी और बच्चे कार में ही बैठे रहते थे और वे उनसे आइसक्रीम खरीदते थे। राम को यह भी याद है कि राजीव गांधी को विनीला आइसक्रीम खासतौर पर पसंद थी।
इटेलियन डिश पिज्जा था राजीव का फेवरेट
वरिष्ठ लेखक और पत्रकार शाहिद सिद्धिकी को याद है 1981 की वह घटना जब राजधानी के चाणक्य सिनेमा के पास नरूला रेस्तरां खुला था। वह वहां पर लाइन में खड़े होकर पिज्जा खरीद रहे थे मानो वह कोई सामान्य शख्स हों। रेस्तरां में उनके साथ सोनिया और उनके मित्र अरुण सिंह और उनकी पत्नी भी थे। नई दुनिया अख़बार के संपादक शाहिद सिद्धिकी ने यह भी बताया कि वे बेहद सादे तरीके से जीवन व्यतीत करना पसंद करते थे। कभी यह नहीं दिखाते थे कि वह किस परिवार से संबंध रखते हैं।
तस्वीरों के साथ पढ़ें राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें जो शायद आप नहीं जानते।

राजीव गांधी की भाषा
राजीव गांधी घर में हिन्दुस्तानी बोलते थे। उनकी भाषा में उर्दू का टच रहता था।

राजनीति में आने से पहले नहीं ली सुरक्षा
राजीव गांधी राजनीति में आने से पहले बिना पुलिस सुरक्षा लिए राजधानी में घूमते थे।

पीएम हाउस छोड़ना चाहते थे
वह इंदिरा गांधी के पीएम काल के अंतिम दिनों में पीएम हाऊस छोड़ना चाहते थे क्योंकि वहां पर रोज सैकड़ों लोग आते थे। इससे उन्हें बहुत उलझन होती थी।

पायलट बनने से पहले कमाते थे 2 हजार रुपए
राजीव गांधी इंडियन एयरलाइंस में पायलट बनने से पहले मात्र 2000 रुपए की नौकरी करते थे। उनकी कंपनी को पता तक नहीं था कि वो प्रधानमंत्री के बेटे हैं।

नहीं जाना चाहते थे राजनीति में
संजय गांधी की मौत के पहले तक राजीव गांधी राजनीति में कदम तक नहीं रखना चाहते थे।












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