राजीव हत्याकांड: राहुल गांधी जी अफसोस हम अमेरिका जैसे नहीं

Rahul Ganhdi Amethi
राहुल गांधी को अगर बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष देखें तो उनका जीवन आलोचनाओं से घिरा हुआ है, लेकिन सिर्फ एक व्यक्त‍ि के तौर पर देखें, तो यह वो व्यक्त‍ि है जो अपने लिये नहीं जीता है, वो व्यक्त‍ि है, जो गरीबों के दु:ख दर्द को अपना समझते हुए उसे कम करने के प्रयास करता है, लेकिन अफसोस हमारे देश की व्यवस्था (न्यायिक और राजनीतिक) दोनों ने ही राहुल के दर्द को नहीं समझा। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह दर्द सिर्फ राहुल का नहीं पूरे देश का है। लेकिन अफसोस हम अमेरिका जैसे नहीं।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के पिता के हत्यारों की फांसी की सजा माफ की और उसके ठीक दूसरे ही दिन तमिलनाडु सरकार ने उन्हें जेल से आजाद करने का ऐलान कर दिया। ये दोनों फैसले राहुल के दिल को तीर की तरह चुभे। अमेठी में जिस रैली में वो क्षेत्र के विकास की बात करने गये थे, वहां उनके मुंह से विकास से संबंध‍ित स्वर बाद में फूटे, पहले दिल का दर्द होठों पर आ गया।

राहुल बुधवार को अमेठी रैली के दौरान भावुक हो उठे। देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को देख उनके आंसू छलके नहीं, पर आंखों के अंदर गहरा उबाल जरूर दिखा। राहुल ने कहा आज देश में प्रधानमंत्री को भी न्याय नहीं मिलता है। राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी.. लेकिन प्रधानमंत्री को न्याय नहीं मिलता।"

लिट्टे से जुड़ी एक आत्मघाती महिला हमलावर ने 1991 में चेन्नई के पास एक चुनावी रैली में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। राहुल ने कहा कि वह मृत्युदंड के खिलाफ हैं, परंतु यह मुद्दा देश से जुड़ा है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता वापस नहीं लौटेंगे, लेकिन यह एक राष्ट्रीय मामला है, यह सिर्फ मेरे परिवार या मेरे पिता से जुड़ा मामला नहीं है। यदि कोई प्रधानमंत्री की हत्या करता है और वह रिहा हो जाता है, तो फिर आम आदमी को कैसे न्याय मिलेगा? यह एक ऐसा प्रश्न है, जिसपर विचार करने की जरूरत है। हिंदुस्तान को बदलने की जरूरत है।"

अमेरिका जैसे क्यों नहीं हैं हम

राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई की खबर सुनने के बाद मेरे मन में सिर्फ एक बात आयी। कि हम अमेरिका जैसे क्यों नहीं हैं। 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले में 4 अमेरिकी नागरिक मारे गये, और 2 घायल हुए। अपने चार सामान्य नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिये अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एफबीआई ने सारे घोड़े खोल दिये और आख‍िरकार हेविड हेडली और तहव्वुर राणा को धर दबोचा। इन दोनों ने कई अन्य आतंकी हमलों को भी अंजाम दिया था।

लेकिन यहां भारत के प्रधानमंत्री की हत्या करने वालों को मौत की जगह जिंदगी दे दी गई। यह दर्द सिर्फ राजीव के बेटे राहुल या बेटी प्रियंका का नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और जयाललिता के फैसलों से हर उस व्यक्त‍ि को दर्द पहुंचा है, जिसने राजीव गांधी को अपना वोट देकर प्रधानमंत्री बनाया था। हर उस व्यक्त‍ि को दु:ख पहुंचा, जिसने अपने देश के लिये कुछ सपने देखे थे। अफसोस इस बात का भी है कि इन फैसलों के वक्त राजीव गांधी के अलावा उन 14 जिंदगियों के बारे में भी नहीं सोचा गया, जिनके शव घटना स्थल पर पाये गये थे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+