लिव-इन में रहने वाली महिलाएं 'रखैल' की तरह: राजस्थान मानवाधिकार आयोग

जयपुर। राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। आयोग ने कहा, 'जो भी महिला लिव-इन रिलेशनशिप में रहती हैं, रखैल की तरह मानी जाती हैं।' आयोग ने ये भी कहा कि ऐसे संबंधों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की है। इन पर तुरंत ही रोक लगनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए राजस्थान महिला आयोग ने कहा कि इस तरह का पाशविक जीवन संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।

राजस्थान मानवाधिकार आयोग का बड़ा बयान

राजस्थान मानवाधिकार आयोग का बड़ा बयान

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने कहा, 'एक महिला को एक रखैल के रूप में रखना उसकी गरिमा के खिलाफ है क्योंकि यह शब्द चरित्र हनन के समान है। ये एक घृणित संबोधन है। एक महिला के लिए, एक रखैल के रूप में जीवन बिल्कुल भी सही नहीं कहा जा सकता, ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी महिलाएं अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती हैं।' ऐसे में आयोग ने बुधवार को राज्य सरकार से लिव-इन रिलेशनशिप की बढ़ती हुई प्रवृत्ति को रोकने के लिए और समाज में महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाने की अनुशंसा की है। इस तरह के कानून को बनाने के लिए केंद्र सरकार को भी चिट्ठी लिखे।

'लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान से बचाना सरकार की जिम्मेदारी'

'लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान से बचाना सरकार की जिम्मेदारी'

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से महिलाओं को लिव-इन रिलेशनशिप से दूर रखने के लिए एक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश टाटिया और सदस्य जस्टिस महेश चंद शर्मा की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया, 'जागरूकता अभियानों के माध्यम से महिलाओं को लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान से बचाना सरकार और मानवाधिकार संगठनों की जिम्मेदारी है।'

'महिला को रखैल के रूप में रखना, उसकी गरिमा के खिलाफ'

'महिला को रखैल के रूप में रखना, उसकी गरिमा के खिलाफ'

राज्य मानवाधिकार आयोग ने आगे कहा कि अगर इस तरह के लिव-इन रिलेशनशिप के संबंध राज्य में हैं तो उसे जल्द से जल्द पंजीकृत करवाए जाएं। मानवाधिकार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए अहम निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप को सर्वोच्च न्यायालय ने भी सही नहीं माना है। सरकार को लिव-इन रिश्तों के लिए एक अलग कानून लाना चाहिए क्योंकि यह केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वो महिलाओं को इस तरह के रिश्तों की बढ़ती प्रवृत्ति से बचाएं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+