योगी के बयान पर राज ठाकरे ने ठोकी ताल, मजदूरों को महाराष्ट्र सरकार से इजाजत लेनी होगी
नई दिल्ली- लगता है कि आने वाले दिनों में प्रवासी मजदूरों का मुद्दा देश में बड़ा राजनीतिक एजेंडा बनने वाला है। यही वजह है कि जब कल यूपी के मुख्यमंत्री ने ये कहा कि अब जो राज्य मजदूरों को काम के लिए ले जाना चाहेंगे उन्हें यूपी सरकार की इजाजत लेनी होगी तो इसमें राजनीतिक रूप से हाशिए पर चल रहे एमएनएस चीफ राज ठाकरे भी कूद पड़े हैं। उन्होंने योगी के बयान को एक नए राजनीतिक हथियार के तौर पर अपनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि आगे से जो मजदूर महाराष्ट्र में काम करना चाहेंगे उन्हें ही राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी।
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योगी आदित्यनाथ के बयान पर राज ठाकरे ने ठोकी ताल
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजदूरों वाले बयान पर जोरदार पलटवार किया है। योगी को जवाब देते हुए राज ठाकरे ने कहा है कि जो मजदूर महाराष्ट्र में काम करने की इच्छा रखेंगे उन्हें महाराष्ट्र सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी। उनका यह जवाब योगी आदित्यनाथ के रविवार को दिए उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो राज्य उत्तर प्रदेश से प्रवासी मजदूरों को काम पर वापस बुलाना चाहेंगे, उन्हें उनकी सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसपर राज ठाकरे ने अपने बयान में कहा है, 'महाराष्ट्र सरकार को इन बातों को गंभीरता से लेनी चाहिए। कोई भी कामगार जो यहां काम करने आता है उसका सरकार और स्थानीय पुलिस के पास बाकायदा रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। उन कामगारों को अपना दस्तावेज और फोटो भी जमा कराना चाहिए।' उन्होंने इस बात पर भी जोर डाला कि सरकार को इस तरह के काम पूरी लगन के साथ करना चाहिए।

'मजदूरों को ले जाने के लिए यूपी की सहमति-अनुमति चाहिए'
बता दें कि रविवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अधिकारियों से एक प्रवासी आयोग बनाने को कहा था और फिर बाद में एक बेविनार के दौरान कहा था कि उत्तर प्रदेश से कामगारों को काम पर बुलाने के लिए दूसरे राज्यों को अब अनुमति लेनी पड़ेगी, क्योंकि कुछ राज्यों ने उनके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया है। योगी ने बेविनार में कहा था, 'प्रवासी आयोग प्रवासी मजदूरों के हित के लिए काम करेगा। अगर किसी और राज्य को यूपी के लोग चाहिए तो वे उन्हें ऐसे ही नहीं ले जा सकते। उन राज्यों को इसके लिए यूपी सरकार से सहमति और अनुमति लेनी पड़ेगी। उन राज्यों में प्रवासी मजदूरों के साथ जितना बुरा बर्ताव किया गया है, यूपी सरकार उनका बीमा, सामाजिक सुरक्षा अब अपने हाथों में लेगी। वो यूपी में, दूसरे राज्यों में या किसी दूसरे देश में जहां भी काम करेंगे तो यूपी सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।'

23 लाख प्रवासी मजदूर लौट चुके हैं यूपी
मुख्यमंत्री ने ये भी कहा था कि यह आयोग कामगारों की स्किल मैपिंग और रोजगार पर काम करने के साथ-साथ उनके वेतन को भी तय करेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा और बीमा का भी ख्याल रखेगा। इस बीच कोरोना और लॉकडाउन पर आयोजित एक रिव्यू मीटिंग में उन्होंने आज अधिकारियों से प्रवासी आयोग के ड्राफ्ट का खाका खींचने को भी कहा है। उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि उनकी सरकार अब तक 23 लाख प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से वापस ले आई है और जो भी लौटना चाहेंगे, सबकी वापसी के लिए तैयार है। बता दें कि महाराष्ट्र से बहुत बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर वापस उत्तर प्रदेश लौटे हैं, जिनकी शिकायत रही है कि वहां की सरकार ने उनके लिए कोई इंतजाम नहीं किया, इसलिए उन्हें अपने राज्यों की ओर लौटना पड़ा है।












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