डबल वोटिंग वाला राहुल गांधी का दावा गलत पाया गया तो क्या होगा? क्या हो सकती है सजा, क्या कहता है कानून
Rahul Gandhi double voting allegation: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बेंगलुरु सेंट्रल की महादेवपुरान विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मतदाता स्तर पर धोखाधड़ी होने का आरोप लगाया है। साथ ही 7 अगस्त को अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में दावा किया था कि वो सभी दस्तावेज भारत निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड से हैं। राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन में एक डॉक्यूमेंट दिखाया था दावा किया था कि एक महिला, शगुन रानी, के पास दो वोटर आईडी कार्ड हैं और उसने दो बार वोट डाला था।
राहुल गांधी के इस दावे पर कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन आधिकारी ने अब राहुल गांधी को नोटिस जारी करके उनके द्वारा लगाए गए मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों पर स्पष्ठीकरण और सबूत मांगे हैं। जिसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए 'डबल वोटिंग' का मामला बड़ी कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है क्योंकि चुनाव आयोग उनके दावे को निराधार बता रहा है। आयोग का कहना है कि उनकी जांच के अनुसार, शगुन रानी ने दो बार वोट नहीं डाला है। जानिए अगर डबल वोटिंग वाला राहुल गांधी का दावा गलत पाया गया तो क्या होगा? क्या कहता है कानून?

डबल वोटिंग वाला दावा गलत पाया गया तो क्या होगा?
अगर राहुल गांधी के द्वारा डबल वोटिंग वाला दावा गलत साबित होता है, तो उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 337 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। धारा 337 गंभीर अपराधों में लागू होती है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति सरकारी दस्तावेज़ों या कोर्ट रिकॉर्ड की जालसाजी करता है। इसमें वोटर आईडी, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड या अन्य सरकारी दस्तावेज़ों में हेरफेर करना शामिल है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग के दस्तावेज़ को गलत तरीके से पेश करना इस दायरे में आ सकता है।
क्या हो सकती है जेल की सजा?
कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऐसे जाली दस्तावेज़ बनाने या इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, चाहे वह कागज़ी हो या इलेक्ट्रॉनिक, तो उसे 7 साल तक की कठोर कारावास और असीमित जुर्माने की सज़ा हो सकती है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह अपराध गैर-जमानती भी हो सकता है, जिसका अर्थ है कि दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से ही ज़मानत लेनी होगी।
राहुल गांधी की बढ़ सकती है मुश्किल
यह मामला राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को खतरे में डाल सकता है। जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत, यदि किसी नेता को 2 साल या उससे अधिक की सज़ा होती है, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता जा सकती है। यदि यह साबित होता है कि राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट से जुड़ा कोई जाली दस्तावेज़ बनाया या इस्तेमाल किया, तो उन्हें धारा 337 के तहत 7 साल तक की जेल, जुर्माना और सांसद पद गंवाने का खतरा हो सकता है।
इस मामले में चुनाव आयोग को कोर्ट में यह साबित करना होगा कि दस्तावेज़ जानबूझकर जाली बनाया गया था या सिर्फ़ गलती से शामिल हुआ था। सबूत की ज़िम्मेदारी अभियोजन पक्ष यानी चुनाव आयोग पर होगी।












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