'हिंसा हल नहीं, सिर्फ शांति ही समाधान', मणिपुर में पीड़ितों से की मुलाकात के बाद राहुल गांधी का बयान

Rahul Gandhi Manipur News: हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर के दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोइरांग पहुंचे, जहां उन्होंने जातीय हिंसा के पीड़ित लोगों के राहत शिविर पहुंचकर उनसे उनका दुख-दर्द जाना।

राहुल गांधी सुबह करीब साढ़े नौ बजे इंफाल से हेलिकॉप्टर से मोइरांग पहुंचे और दो राहत शिविरों में कई प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान कई लोग राहुल गांधी से लिपटकर रोने लगे।

Rahul Gandhi Manipur

चुरचांदपुरा में भी लोगों से की मुलाकात

50 दिनों से ज्यादा दिनों तक जातीय हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर अभी भी शांत नहीं हुआ है। मणिपुर के हालातों को जानने और लोगों से मिलने के लिए राहुल गांधी गुरुवार को मणिपुर पहुंचे थे, जहां पहले दिन उन्होंने चुरचांदपुरा पहुंचकर लोगों से मिले, फिर रात को इंफाल के एक राहत शिविर में जाकर लोगों से मुलाकात की।

मोइरांग राहत शिविर पहुंच राहुल

वहीं अब शुक्रवार को भी राहुल गांधी का हिंसा प्रभावित लोगों से मिलने का सिलसिला जारी है। मोइरांग में लोगों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल ने कहा कि मणिपुर को शांति की जरूरत है। मैं राहत शिविर में गया और हर समुदाय के लोगों से मिला। राहत शिविरों में दवाई, खाने की कमी है जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने हिंसा पर कहा कि मेरी मणिपुर के हर व्यक्ति से अपील है कि शांति बनाए रखें। मैं यहां मौजूद हूं और जो शांति कि लिए कर सकता हूं वह करूंगा। इससे पहले राहुल गांधी ने अपने इंस्टा पोस्ट में लिखा, "मणिपुर में हिंसा के कारण अपने प्रियजनों और घरों को खोने वाले लोगों की दुर्दशा को देखना और सुनना दिल दहला देने वाला है।"

'मदद के लिए चीख-पुकार मची है'

राहुल गांधी ने कहा, "मैं जिस भी भाई, बहन और बच्चे से मिलता हूं, उसके चेहरे पर मदद की पुकार होती है।मणिपुर को अब सबसे महत्वपूर्ण चीज शांति की जरूरत है - हमारे लोगों के जीवन और आजीविका को सुरक्षित करने के लिए। हमारे सभी प्रयासों को उस लक्ष्य की ओर एकजुट होना चाहिए।"

राहुल गांधी संघर्षग्रस्त मणिपुर की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन 10 समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। आपको बता दें कि मोइरांग को ऐतिहासिक रूप से उस शहर के रूप में जाना जाता है, जहां आईएनए (आजाद हिन्द फौज) ने 1944 में भारतीय तिरंगा फहराया था।

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