Rahul Gandhi Lok Sabha: अमित शाह के सामने राहुल गांधी ने अचानक क्या कह दिया? संसद में मच गया बवाल
Rahul Gandhi Lok Sabha: लोकसभा में चुनाव सुधार पर हुई बहस के दौरान माहौल उस समय गर्म हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि,'आरएसएस सभी संस्थानों पर कब्जा करना चाहता है, जबकि देश 150 करोड़ भारतीयों से मिलकर बना है।'
राहुल का यह बयान सीधे तौर पर सत्ता पक्ष पर निशाना था, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा सांसदों ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। इसी बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में टोकते हुए कहा कि राहुल गांधी विषय से भटक रहे हैं, जिसके बाद सदन का माहौल और गर्मा गया।

RSS पर लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) देश के सभी संवैधानिक संस्थानों पर कब्जा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि आज चुनाव आयोग पर भी RSS का नियंत्रण हो गया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव में हुई गड़बड़ी के सबूत भी पेश किए। उनका स्पष्ट कहना है कि चुनाव आयोग का सत्ता पक्ष (सरकार) के साथ तालमेल है, जो लोकतंत्र की निष्पक्षता के लिए एक बड़ा खतरा है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति पर सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति की प्रक्रिया से क्यों हटाया गया। उन्होंने उस बैठक का जिक्र किया जिसमें वह, प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे। उनका आरोप है कि दिसंबर 2023 में नियम बदलकर यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित न किया जा सके (इम्यूनिटी दी जाए)। राहुल गांधी ने पूछा कि आखिर CJI को चयन प्रक्रिया से अलग क्यों किया गया।
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'कब्जे' और 'इम्यूनिटी' के प्रावधान
राहुल गांधी ने स्पष्ट आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह सरकार लोकतंत्र को क्षति पहुँचाने के लिए चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से दिसंबर 2023 में लाए गए उस कानून का उल्लेख किया जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को इम्यूनिटी (दंड से सुरक्षा) दी गई है। उनका कहना है कि यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि नियुक्त किए गए आयुक्तों पर कोई कार्रवाई न हो सके, जिससे वे सरकार के नियंत्रण में काम कर सकें। यह कदम लोकतंत्र की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए खतरनाक है।












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