राहुल गांधी ने अडानी से मिला लिया हाथ! कहां, कब और कैसे हुआ ये? यूजर बोले- अब बताओ कौन किसके साथ है?
Rahul Gandhi Gautam Adani: देश की राजनीति में इन दिनों एक मुलाकात को लेकर जबरदस्त चर्चा है। बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उद्योगपति गौतम अडानी की है। दोनों की यह मुलाकात किसी राजनीतिक मंच पर नहीं, बल्कि एक निजी डिनर पार्टी में हुई। मौका था एनसीपी (एसपी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार के 85वें जन्मदिन से पहले आयोजित डिनर का। यह कार्यक्रम 10 दिसंबर 2025 को दिल्ली स्थित 6 जनपथ आवास पर रखा गया था।
इस डिनर पार्टी में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ-साथ कई बड़े राजनीतिक चेहरे और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए। इसी दौरान गौतम अडानी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींच लिया। इस डिनर पार्टी में राहुल गांधी और गौतम अडानी का आमना-सामना हुआ था।

अडानी और राहुल गांधी में हैंडशेक हुआ या नहीं? रिपोर्ट्स में बड़ा दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी डिनर के दौरान राहुल गांधी और गौतम अडानी आमने-सामने आए और दोनों ने एक-दूसरे से हाथ भी मिलाया। इस हैंडशेक की चर्चा कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी सार्वजनिक मंचों पर की है। कहा जा रहा है कि यह मुलाकात बेहद छोटी और औपचारिक थी, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूर तक जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस लंबे समय से अडानी समूह को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में राहुल गांधी और अडानी का हाथ मिलाना स्वाभाविक तौर पर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि राहुल गांधी जी अब आप बताइए कौन किसके साथ है? कई यूजर ने कहा है कि यही वजह है कि राहुल गांधी पिछले कई दिनों से अडानी पर अक्रामक नहीं हो रहे हैं।
तस्वीर क्यों नहीं आई सामने, सुप्रिया सुले की भूमिका
इस पूरी घटना की सबसे खास बात यह है कि इस मुलाकात की कोई तस्वीर सामने नहीं आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक जैसे ही राहुल गांधी और गौतम अडानी एक साथ नजर आए, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले तुरंत सतर्क हो गईं। बताया जाता है कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी इस पल की तस्वीर न ले सके।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सुप्रिया सुले को अंदाजा था कि अगर दोनों की फोटो बाहर आ गई, तो इसका राजनीतिक असर कितना बड़ा हो सकता है। इसी वजह से इस मुलाकात को कैमरों से दूर रखा गया।
क्या अडानी पर कांग्रेस का रुख हो रहा है नरम?
पिछले कुछ समय से यह भी देखा जा रहा है कि अडानी समूह को लेकर कांग्रेस का रुख पहले जैसा तीखा नहीं रहा। हाल ही में आई कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स पर भी कांग्रेस की ओर से वैसी आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दिखी, जैसी पहले देखने को मिलती थी।
राजनीतिक जानकार इसे बदलते सियासी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। खासतौर पर तब, जब कांग्रेस शासित राज्यों में अडानी समूह के निवेश को खुले तौर पर स्वीकार किया जा रहा है।
तेलंगाना निवेश और बदला सियासी सुर
इस डिनर पार्टी में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी मौजूद थे। हाल ही में उनकी मौजूदगी में आयोजित 'तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट 2025' में अडानी समूह ने राज्य में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है।
अडानी समूह के प्रबंध निदेशक करण अडानी ने तेलंगाना सरकार और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए रक्षा निर्माण, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में निवेश की जानकारी दी।
एक मुलाकात, कई सवाल
कुल मिलाकर, राहुल गांधी और गौतम अडानी की यह मुलाकात भले ही एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत साफ नजर आ रहे हैं। सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार था या कांग्रेस के अडानी को लेकर बदले रुख की एक झलक। फिलहाल जवाब भविष्य की राजनीति ही देगी, लेकिन इतना तय है कि इस हैंडशेक ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।












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