राजनीतिक प्रपंचों की कसौटी को पार कर भारत आ रहा राफेल
बेंगलुरु। लंबे इंतजार के बाद अत्याधुनिक लड़ाकू विमान 'राफेल' हमारी वायुसेना में शामिल हो रहा है। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल में उड़ान भरेंगे। जिसके बाद इसे वायुसेना को सौंप दिया जाएगा। देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही अहम यह राफेल विमान को लाने में मोदी सरकार को बहुत लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिए गए कई अहम फैसलों में राफेल को खरीद एक देश की सुरक्षा की दृष्टि से अहम था। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने नकारात्मक राजनीति करते हुए राफेल डील को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाकर कटघरे में खड़ा कर दिया।

ऐसे में कई ऐसे मौके आए जब कांग्रेस मोदी के फायदेमंद साबित हुए राफेल ने कांग्रेस और राहुल गांधी को खूब लाभ हुआ। राफेल तो अभी देश में आ रहा हैं लेकिन इस पर हुई राजनीति के चलते मोदी और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पहले ही इस पर खूब ऊंची उड़ान भर चुके है! जिस राफेल को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी के खिलाफ उड़ान भरी थी। वही राफेल कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए गले की फांस साबित हुआ और कांग्रेस विलुप्त होती नजर आ रही है और जिस राफेल लड़ाकू विमान को लेकर इतना बवाल हुआ वो भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होकर सामरिक ताकत बढ़ी हैं। जिससे भारत का पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान आंख उठाकर देखने की हिमाकत नहीं करेगा।

मानसून सत्र में राहुल उठाया यह मामला
गौरतलब हैं कि ठीक एक वर्ष पहले 2018 के मानसून सत्र में संसद में जहां राफेल को लेकर राहुल गांधी सरकार पर हमलावर थे। तो वहीं देश की सरकार डिफेंसिव मोड में थी और कांग्रेस द्वारा उठाए इस मुद्दे को लेकर अपना बचाव करती नजर आ रही थी। अब अगर इस एक साल पर गौर करें तो बहुत सी रोचक बातें हैं जिसमें राफेल डील में कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा का पलड़ा भारी रहा। मानसून सत्र 2018 में राहुल गांधी द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाया गया। तब अपने भाषण के बाद जिस तरह राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाया था उसे भी कांग्रेस और राहुल गांधी के समर्थकों द्वारा एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया था। तब कांग्रेस के इस रूप पर भाजपा और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी भी भौचक्के रह गए थे और जैसा रुख था तब या तो भाजपा अपनी बगलें झांक रही थीं या फिर वो अपनी बातों को तर्क की चाशनी में डुबोकर केवल अपना बचाव कर रही थी। उस समय जैसे आरोप राहुल गांधी ने लगाए थे एक बार को लगा था कि राफेल मोदी सरकार के लिए गले की हड्डी की तरफ हो गया था। इस समय जैसा रुख राहुल गांधी का था उसने न सिर्फ राहुल को लोकप्रिय किया। बल्कि इससे पार्टी को भी मजबूती मिली।

जब कांग्रेस ने राफेल से भरी तीन राज्यों में जीत की उड़ान
ये राहुल गांधी के मानसून सत्र में राफेल पर दिए गए भाषण का जोश ही था कि तमाम प्रमुख मोर्चों पर हार का सामना कर चुके और पस्त पड़े कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं में जोश आया और मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में वो हुआ जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने कभी की हो। इस तरह राफेल डील पर राहुल गांधी ने भाजपा को घेरकर राजनीति में खूब उड़ान भरी। कांग्रेस द्वारा हिंदी भाषी तीन बड़े राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले विधान सभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करना वाकई जश्न मनाने योग्य बात थी। कार्यकर्ताओं के अलावा कांग्रेस पार्टी के नेताओं को लंबे समय बाद इतनी बड़ी खुशी मिली थी। लेकिन वह अपनी जीत का जश्न ठीक से मना भी नहीं पाए थे कि सुप्रीम कोर्ट के राफेल मामले में दिए गए फैसले से जबरदस्त झटका लगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस को लगा सदमा
राफेल के नाम पर हवा में उड़ रही कांग्रेस और राहुल गांधी की जीत का जश्न अचानक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से क्रेश हो गया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और राहुल गांधी को गहरा आघात दिया। मामले पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जिस तरह भाजपा ऊपर गई उसने जश्न मनाती कांग्रेस को फ़ौरन ही सदमे में डाल दिया। बता दें राफेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि, मोदी सरकार द्वारा फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने में कोई बुराई नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले का अध्ययन "बड़े पैमाने पर" किया गया था और इस प्रक्रिया में संदेह का कोई अवसर नहीं है। राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस के रुख में बह रही राजनीति की बयार बंद हो गयी। अचानक केन्द्र में बैठी भाजपा मोदी सरकार का पलड़ा बहुत भारी हो गया। कहते हैं कि नाकारात्मक राजनीति गर्त की ओर ले जाती है ऐसा ही इस मामले कांग्रेस के साथ हुआ। इस हार के बाद कांग्रेस और पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए यह समझ से परे था कि आखिर ऐसा क्या किया जाए जिससे बेइज्जती से बचा जा सके।

राहुल के चौकीदार चोर है' के खिलाफ मोदी का 'मैं भी चौकीदार' अभियान
कांग्रेस और राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभ चुनाव के मद्देनजर दोबारा राफेल डील को लेकर मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया लेकिन दूसरी बार उसे केवल फजीहत ही नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी का जबरदस्त फटकार भी पड़ी। गौरतलब है कि मार्च 2919 में राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा बयान दे डाला था कि राफेल की फाइलें वैसे ही गायब हुई हैं जैसे नोटबंदी और जीएसटी। तब खुद को अलग-अलग मंचों से चौकीदार बताने वाले देश के प्रधानमंत्री मोदी को चोर बनाते हुए राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है का नारा दिया था। दिलचस्प बात ये है कि जनता को भटकाने के लिए तब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की कड़ी फटकार लगाई थी और उनसे माफ़ी मांगने को कहा था। कोर्ट ने राहुल से सवाल किया कि हमने तो किसी फैसले में कहा ही नहीं कि 'चौकीदार चोर है', आपने ये हमारे नाम से कैसे इस्तेमाल किया? कोर्ट के सामने अपने को घिरता देख राहुल ने भी माफ़ी मांग कर मामला रफा दफा करने की कोशिश की थी। राफेल सौदे से जुड़ी फाइलों के गायब होने के बाद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला तो किया मगर वो अपनी ही बातों में फंस गए।
गौरतलब हैं कि भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने इस संबंध में राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि 'हमने कभी नहीं कहा चौकीदार चोर है। ' दरअसल राहुल ने कोर्ट के इस फैसले पर कहा था कि अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि 'चौकीदार चोर है'। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राहुल से कहा कि आप हमें कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहे हैं, हम अभी इससे ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहते। इसके बाद राहुल के वकील और सीनियर कांग्रेस लीडर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम इस मामले में खेद जता चुके हैं। इस पर कोर्ट और सख्ती से पेश आया और पूछा कि आपके जवाब में वो 'खेद' हमें क्यों नज़र नहीं आ रहा है। 2019 के आम चुनावों में राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' के खिलाफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने 'मैं भी चौकीदार' अभियान चलाया। ये अभियान कितना सफल हुआ इसका परिणाम 2019 के चुनाव में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत थीं।
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