पंजाब-हरियाणा HC ने नाबालिग की शादी को बताया वैध, कहा- मुस्लिम लड़कियां 16 की उम्र में कर सकती हैं शादी
नई दिल्ली, 20 जून: मुस्लिम लड़की की शादी को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अलग फैसला सुनाया है। इस्लामिक शरिया नियम का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम लड़की की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होती है। इस वजह से 16 साल से ज्यादा उम्र की मुस्लिम लड़की अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ शादी के लिए स्वतंत्र है। इसके अलावा कोर्ट ने पठानकोट पुलिस को याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा मुहैया करवाने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक उनकी शादी 8 जून 2022 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। हालांकि उनका परिवार इसके लिए राजी नहीं था, जिस वजह से उनको लगातार धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ता ने लड़की की उम्र 16 से साल से ज्यादा और अपनी उम्र 21 साल बताई। साथ ही अपनी याचिका में दोनों को सुरक्षा मुहैया करवाए जाने की मांग की।
याचिकाकर्ता ने कहा कि 'प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ' किताब के अनुच्छेद 195 के मुताबिक याचिकाकर्ता 2 यानी लड़की 16 साल से ज्यादा उम्र की है, ऐसे में वो अपने पसंद की लड़के के साथ शादी करने के लिए सक्षम है। इसके अलावा लड़के की उम्र भी 21 साल है। इस तरह दोनों याचिकाकर्ता मुस्लिम पर्सनल लॉ द्वारा परिकल्पित विवाह योग्य आयु के हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की एकल पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ताओं ने अपने परिवार के सदस्यों की इच्छा के खिलाफ शादी कर ली है, उन्हें भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा याचिकाकर्ता को जो आशंकाएं हैं, उनको दूर करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने एसएसपी पठानकोट को आदेश दिया कि वो जोड़े को सुरक्षा प्रदान करें और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।












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