पर जनता नहीं चाहती ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध
ऑनलाइन पोल में खबर लिखे जाने तक 969 लोग भाग ले चुके हैं, जिनमें से 721 लोगों ने कहा कि ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध कतई नहीं लगना चाहिये, वहीं 25.6 फीसदी यानी 248 लोगों ने दिग्विजय सिंह की बात पर सहमति व्यक्त की है। यह पोल अगले 25 दिन तक खुला है, आप भी अपना मत प्रकट कर सकते हैं। पोल में हिस्स लेने के लिये इस सवाल पर क्लिक करें- क्या ओपिनियन पोल पर बैन लगाया जाना चाहिये?
राजनीतिक बहस
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्विजय के बयान का मजाक बनाते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे तो कोर्ट पर भी बैन लगा सकती है, ओपिनियन पोल तो उसके आगे छोटी चीज है। वहीं भाजपा के प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस को अब तक के ओपिनियन पोल के परिणामों को देख डर लगने लगा है। भाजपा नेता कीर्ति आजाद ने कहा कि मोदी की लहर को देख कांग्रेस बौंखला गई है, इसलिये ऐसे अनापशनाप कार्यों में लग गई है।
कांग्रेस नेता व संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ल ने कहा कि ज्यादातर ओपिनियन पोल मनघड़ंत होते हैं, लिहाजा इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। भाजपा के अरुण जेटली ने कहा कि हो सकता है कि कुछ ओपिनियन पोल गलत हो जायें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस पर प्रतिबंध ही लगा दिया जाये।
इससे पहले
चुनाव आयोग ने इस संबंध में राजनीतिक दलों से राय मांगी थी। इस पर 30 अक्टूबर को कांग्रेस ने अपना जवाब भेजा, जिसमें ओपिनियन पोल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर सहमति व्यक्त की। कांग्रेस ने कहा कि ओपिनियन पोल न तो वैज्ञानिक हैा और न ही इन सर्वेक्षणों की कोई पारदर्शिता, लिहाजा इन पर प्रतिबंध लगाना ही बेहतर है।













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