'अलगाववादियों के साथ मिलकर काम कर रही थीं महबूबा मुफ्ती'
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। जिसके बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। लेकिन पीएसए के जो दस्वावेज (डॉजियर) सामने आए हैं उसमे कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती अलगाववादियों के साथ काम मिलकर काम कर रही थीं। द हिंदू की खबर के अनुसार मुफ्ती के खिलाफ एक गोपनीय रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमे कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती अलगाववादियों के साथ मिलकर काम कर रही थीं, इसी के चलते उनके खिलाफ पीएसए के तहत केस दर्ज किया गया है।

ट्वीट का जिक्र
रिपोर्ट में कई ट्वीट का भी जिक्र किया गया है जिसमे महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादियों की मौत के बाद उनके सम्मान की बात कही है और सेना पर आरोप लगाया है कि उसने अलगाववादियों के खिलाफ केमिकल हथियार का इस्तेमाल किया है। महबूबा मुफ्ती के खिलाफ दायर रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि उनके दो ट्वीट जिसमे उन्होंने तीन तलाक कानून और देश में मुसलमानों के साथ हो रही लिंचिंग का जिक्र किया है, वह सही परिपेक्ष्य में नहीं थे।

महबूबा मुफ्ती के दो भाषण का जिक्र
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 370 और 35ए को खत्म किए जाने के खिलाफ जो रैलियां की उसका भी जिक्र दोनों के खिलाफ पीएसए के तहत दर्ज मामले में जिक्र किया गया है। डोजियर में दोनों के कई भाषणों का जिक्र किया गया है। जुलाई 2019 को महबूबा मुफ्ती ने एक भाषण दिया था जिसमे उन्होंने कहा था कि आर्टिकल ल35ए के साथ छेड़ छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। जो हाथ 35ए के साथ छेड़ छाड़ करने के लिए उठेंगे वो हाथ नहीं वो सारा जिस्म जल के राख हो जाएगा। एक अन्य भाषण में उन्होंने कहा था कि अगर आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया गया तो जम्मू कश्मीर में तिरंगा फहराने के लिए कोई नहीं बचेगा।

भाषण भड़काऊ
डोजियर में उमर अब्दुल्ला की गिरफ्तारी को सही बताते हुए कहा गया है कि उन्होंने आर्टिकल 370 और 35ए को लेकर जो भाषण दिए हैं वह काफी भड़काऊ हैं। महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को भड़काऊ बयान की वजह से जेल नहीं भेजा गया है। उनका अपराध यह था कि उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में लिए गए गैरकानूनी कदम का विरोध किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हसनैन मसूदी ने कहा कि ये पीएसए घाटी में सबकुछ सामान्य हैं के दावे की पोल खोलते हैं। इसका इस्तेमाल उन लोगों के खिलाफ किया जा रहा है जो अलग विचार रखते हैं और विरोध कर रहे हैं, जोकि लोकतंत्र का मूल है।












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