लोकसभा चुनाव 2019: सिकंदराबाद लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: तेलंगाना की सिकंदराबाद लोकसभा सीट से भाजपा के दिग्गगज और पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस के अंजन कुमार यादव को 2,54,735 वोटों से हराया था, दत्तात्रेय को 43.62 फीसदी यानी 4,38,271 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के अंजन कुमार यादव को 18.27 फीसदी यानी 1,83,536 वोटों पर संतोष करना पड़ा था, तीसरे नंबर पर AIMIM के एन. मोहन राव रहे थे, उन्हें 14.5 फीसदी यानी 145,120 वोट मिले थे तो वहीं चौथे नंबर पर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति के टी. भीष्म को 14.3 फीसदी यानी 143,847 वोट मिले थे, इससे पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अंजन कुमार यादव ने भाजपा के बंडारू दत्तात्रेय को करीब 1.70 लाख वोटों से मात दी थी।

profile of Secunderabad lok sabha constituency

सिकंदराबाद लोकसभा सीट का इतिहास
सिकंदराबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधान सभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं सिकंदराबाद, मुशीराबाद, अम्बरपेट, खैराताबाद, जुबली हिल्स, सनथ नगर और नामपल्ली। 2018 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद यहां पर सात में से छह सीटों पर टीआरएस को जीत मिली और एकमात्र सीट पर एआईएमआईएम का विधायक बना था। साल 1957 में यहां पहला आम चुनाव हुआ था, जिसे कि कांग्रेस ने जीता था, इसके बाद लगातार तीन बार इस सीट पर कांग्रेस का ही राज रहा, साल 1971 का चुनाव यहां पर निर्दलीय उम्मीदवार के नाम रहा, उसके बाद साल 1977 से लेकर साल 1989 तक यहां पर कांग्रेस ही जीतती आई। साल 1991 में यहां पर भाजपा जीती तो साल 1996 का चुनाव एक बार फिर से कांग्रेस के ही नाम रहा लेकिन 1998 और 1999 दोनों ही सालों में यहां पर कमल खिला लेकिन साल 2004 और 2009 में यह सीट कांग्रेस के ही पास रही लेकिन साल 2014 का चुनाव यहां पर भाजपा ने जीता और बंडारू दत्तात्रेय यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे। वो इससे पहले भी दो बार साल 1998-99 में भी यहां से सांसद चुने जा चुके हैं और वह तीसरी बार लोकसभा में यहां के लोगों के प्रतिनिधि बने हैं।
सिकंदराबाद, परिचय-प्रमुख बातें-
सिकंदराबाद को हैदरबाद का जुड़वां शहर के रूप में जाना जाता है। इस शहर का नाम सिकंदर जाह के नाम पर पड़ा है। उनका संबंध आसिफ जाही वंश से था और वह हैदराबाद के तीसरे निजाम थे। सिंकदराबाद की स्थापना 1806 में की गई थी और आजादी तक यह मुख्य रूप से ब्रिटिश सेनिकों की छावनी था। हैदराबाद जहां नवाबों का शहर था वहीं सिकंदराबाद अंग्रेजों का शहर था। सिकंदराबाद आज भी हैदराबाद की छावनी ही है और बड़ी संख्या में जल सेना, थल सेना व वायु सेना से जुड़े लोगों का संबंध यहां से है। हुसैन सागर झील दोनों शहरों को अलग करती है, यहां की जनसंख्या 22, 14, 762 है, यह लोकसभा शहरी क्षेत्र में है, यहां पर 8 प्रतिशत लोग एससी वर्ग हैं और 1 प्रतिशत आबादी एसटी वर्ग की है।
बंडारू दत्तात्रेय का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद बंडारू दत्तात्रेय की संसद में उपस्थिति 79 प्रतिशत रही है, इस दौरान इन्होंने 3 डिबेट में हिस्सा लिया है और 12 प्रश्न पूछे हैं। इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से 23 बिल और 3 प्राइवेट मेंबर्स रेजोल्यूशन पेश किए हैं, उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए संसद निधि में से 10 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जो ब्याज समेत मिलाकर 14.20 करोड़ रुपये हो गए थे, जिसमें से उन्होंने 12.42 करोड़ रुपये खर्च किए हैं । साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 18, 93, 647 थी, जिसमें से केवल 10, 03, 769 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 545, 749 और महिलाओं की संख्या 458,020 थी।

सिकंदराबाद लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है, अकेले कांग्रेस यहां से 12 बार जीती है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी भी यहां 4 बार विजयी हो चुकी है, इन दोनों दलों के अलावा यहां से कोई तीसरी पार्टी आज तक लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकी है, ऐसे में इस बार भी यही उम्मीद की जा रही है कि इन्हीं दो बड़ी पार्टियों के ही बीच इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, हालांकि पिछले चुनाव में बंडारू दत्तात्रेय की जीत में मोदी लहर की भी अहम भूमिका थी, देखते हैं इस बार यहां की जनता किसे अपना सरताज चुनती है।

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