लोकसभा चुनाव 2019: कांकेर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की कांकेर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद विक्रम देव उसेंडी हैं। बीजेपी के विजेता उम्मीदवार विक्रम देव उसेंडी को 4 लाख 65 हज़ार 215 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार फूलो देवी उनसे 35 हज़ार 158 वोट पीछे रह गयीं। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान कांकेर में 14 लाख 47 हज़ार से ज्यादा मतदाता थे। महिला मतदाताओं की तादाद मामूली रूप से ही सही मगर पुरुषों से ज्यादा थी। यहां महिला मतदाताओं की संख्या 7 लाख 25 हज़ार 435 है। हालांकि मतदान करने में पुरुषों ने बाजी मारी। महिलाओं के मुकाबले करीब 14 हज़ार पुरुष मतदाताओं ने अधिक मतदान किया। कांकेर में 70 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले।

profile of Kanker lok sabha constituency

कांकेर लोकसभा सीट पर 1998 के बाद से लगातार बीजेपी का कब्जा है। यहां से बीजेपी ने पांच बार लोकसभा का चुनाव जीता है जबकि कांग्रेस के नाम 6 बार चुनाव में जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड है। एक बार जनता पार्टी और एक बार जनसंघ ने कांकेर लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी। कांकेर लोकसभा सीट में 8 विधानसभा की सीटे हैं। सभी 8 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। कांकेर वह लोकसभा सीट है जहां की एक भी विधानसभा सीट बीजेपी 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत पाने में विफल रही। कांकेर लोकसभा के अंतर्गत जो सीटें आती हैं उनमें शामिल हैं सिहावा, संजरी बालोद, डोंडी लोहरा, गुंडेरडेही, अंतागढ़, भानु प्रतापपुर, कांकेर, केशकाल।

विक्रम देव उसेंडी का लोकसभा में प्रदर्शन

बीजेपी सांसद विक्रम देव उसेंडी ने पिछले पांच सालों में 25 बार लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने 114 सवाल संसद में पूछे। उपस्थिति के मामले में विक्रम देव उसेंडी ने संसद मे अच्छा प्रदर्शन किया है। वे पांच सालों में 96 फीसदी उपस्थिति बनाने में कामयाब रहे। दिसम्बर 2018 तक की स्थिति के अनुसार बीजेपी सांसद निधि में 5 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की जानी बाकी थी। 25 करोड़ की सांसद निधि से महज 17.5 करोड़ की राशि ही जारी गयी है। इनमें महज 12 करोड़ 54 लाख की रकम खर्च की जा सकी है।

कांकेर की आबादी 21 लाख से ज्यादा है। इस लोकसभा सीट में ग्रामीण मतदाताओं की तादाद करीब 89 फीसदी है। आदिवासियों की आबादी 48 फीसदी है जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की तादाद यहां करीब पौने छह फीसदी है। लोकसभा चुनाव में कांकेर की सीट पर जोर आजमाइश होगी। बीजेपी जहां अपनी सीट बचाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस इस लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों को जीत लेने के बाद अब नये उत्साह के साथ यहां चुनाव मैदान में उतरेगी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने का मनोवैज्ञानिक फायदा भी कांग्रेस को मिलेगा। कह सकते हैं कि 2019 में कांकेर की सीट कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के लिए समान रूप से खुली हुई है। यानी बाजी कोई भी मार ले जा सकता है।

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