लोकसभा चुनाव 2019: जालौर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: राजस्थान की जालौर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के देवजी पटेल हैं। उन्होंने 2014 के चुनाव में इस सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। साल 2014 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की आंजणा उदयलाल को 38, 11, 45 वोटों से हराया था। देवजी पटेल को 5 लाख 80 हजार 508 वोट प्राप्त हुए थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी आंजणा उदयलाल को 1 लाख 99 हजार 363 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। यहां कांग्रेस से बगावत करने वाले पूर्व मंत्री निर्दलीय प्रत्याशी सरदार बूटासिंह 1 लाख 75 हजार 344 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे। राजस्थान का ऐतिहासिक नगर जालौर को प्राचीनकाल में 'जाबालिपुर' के नाम से जाना जाता था। 12वीं शताब्दी में यह चौहान गुर्जर की राजधानी था। अरावली पर्वत शृंखलाओं के पहाड़ जालोर के लिए अमूल्य धरोहर के रूप में है, इन पहाड़ों से निकलने वाले ग्रेनाइट ने देश ही नहीं विदेश में भी जालोर को पहचान दी है, 1200 के करीब ग्रेनाइट इकाइयों के कारण आज जालोर देश में ग्रेनाइट सिटी के नाम से जाना जाता है, यहां की कुल आबादी 28,65,076 है, जिसमें से 87 प्रतिशत आबादी गांवों मे रहती है और 12 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

जालौर लोकसभा सीट का इतिहास
आठ विधानसभा सीटों वाले इस संसदीय क्षेत्र में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ था, जिसे निर्दलीय उम्मीदवार भवानी सिंह ने जीता था। इसके बाद यहां कांग्रेस का राज हो गया। साल 1957 और 1962 में यहां पर केवल कांग्रेस का बोलबाला रहा लेकिन 1967 का चुनाव यहां पर स्वतंत्रता पार्टी ने जीता। इसके बाद 1971 में यहां पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की लेकिन 1977 का चुनाव यहां पर जनता पार्टी ने जीता। साल 1980 में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और 1984 का चुनाव कांग्रेस ने ही जीता और सरदार बूटा सिंह यहां से सांसद बने लेकिन 1989 का चुनाव यहां पर पहली बार भाजपा ने जीता और कैलाश चन्द्र मेघवाल यहां की सांसद की कुर्सी पर बैठे। साल 1991 में एक बार फिर सरदार बूटा सिंह का सिक्का चला और कांग्रेस यहां जीती और इसके बाद साल 1999 तक यहां कांग्रेस का ही राज रहा और सरदार बूटा सिंह यहां के एमपी चुने गए। वहीं साल 2004 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के खाते में चली गई और तब से ही ये भाजपा के ही पास है और कांग्रेस यहां जीत के लिए तरस गई है।
जन-जन में बेहद लोकप्रिय इस सीट के मौजूदा सांसद देवजी पटेल ने 15वीं लोकसभा कार्यकाल के दौरान संसद में सक्रियता के साथ राजस्थान के सांसदों में दूसरा स्थान प्राप्त किया था और 16वीं लोकसभा में भी सर्वश्रेष्ठ सक्रिय पांच सांसदों की सूची में शामिल हैं। इन्होंने भारत के सक्रिय युवा सांसद के रूप में अपनी पहचान बनाई हैं। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में इनकी उपस्थिति 82 प्रतिशत रही थी और इस दौरान इन्होंने 204 डिबेट में हिस्सा लिया है और 508 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में यहां वोटरों की संख्या 18,24,968 थी, जिसमें से मात्र 10,87,272 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,81,038 और महिलाओं की संख्या 5,06,234 थी।
जालोर जिले में विभिन्न चुनावों में जातिवाद का जोर हावी रहता आया है। कुछ गांवों को छोड़ दे तो अधिकांश गांवों में जातिगत समीकरण और परम्परागत वोट बैंक के आधार पर ही हार जीत तय होती है, जिसका फायदा लगातार दो बार से भाजपा उठाती आ रही है लेकिन क्या इस बार भी यह गणित यहां पर उसके लिए सही साबित होगी, वो भी तब, जब विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा है, तो वहीं कांग्रेस इस सीट को पाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी, देखते हैं शह और मात के इस खेल में बाजी किसके हाथ लगती है।












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