लोकसभा चुनाव 2019: कूचबिहार लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की कूचबिहार सीट के पार्था प्रतिम( Partha Pratim)सांसद हैं। 22 लाख से ज्यादा की आबादी वाला यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इस शहर के बारे में कहा जाता है कि प्राचीन समय में यहां पर कोच राजाओं का शासन था और वह नियमित रूप से बिहार की यात्रा किया करते थे। इस कारण इसका नाम कूच बिहार पड़ा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां तृणमूल कांग्रेस की रेणुका सिन्हा जीत कर लोकसभा पहुंची थी। लेकिन, 17 अगस्त 2016 को उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई। जिसके बाद यहां उप- चुनाव हुए और विजयी रहे तृणमूल कांग्रेस के पार्था प्रीतम। तृणमूल कांग्रेस के पास था प्रीतम को यहां से 794375 वोट मिले वहीं दूसरे नंबर पर है हेमचंद्र भ्रमण जिन्हें 381134 वोट मिले। तृणमूल कांग्रेस को यहां से चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत मिली।

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाए तो कूचबिहार सीट पर ज्यादातर मौकों पर कांग्रेस और इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक का कब्ज़ा रहा है। साल 1951 में यहां से कांग्रेस के उपेंद्र नाथ सांसद थे, जो कि 1962 तक बने रहे। 1962 में यहां ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने जीत हासिल की। जब देवेंद्र नाथ यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे। लेकिन, 1983 में यहां पर बाय इलेक्शन हुए जिसमें कांग्रेस को जीत मिली और पी सी वर्मा जीत कर लोकसभा पहुंचे। लेकिन जब 1967 में चुनाव हुए तो विनोद कृष्णदास चौधरी को जीत मिली और वो 1977 तक सांसद रहे। हालांकि, 1971 में वह कांग्रेस पार्टी की सीट से चुनाव लड़े थे। 1977 में चुनाव में यहां ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने बाजी मारी और सांसद बने अमरेंद्र नाथ रॉय प्रधान जो कि लगातार जीते चले गए और 2004 तक यहां पर सांसद रहे। 2004 में ऑल इंडिया फॉरवर्ड के सांसद जीत कर लोकसभा पहुंचे। 2009 में फिर ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक को यहां से जीत मिली और इस बार सांसद थे नरेंद्र नाथ रॉय। लेकिन, 2014 में बाजी पलट गई और पहली बार ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को यहां से जीत मिली। सांसद थी रेणुका सिन्हा। हालांकि 17 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो गया जिसके बाद यहां उप-चुनाव हुए।
36 साल के पार्था प्रीतम लोकसभा के पढ़े-लिखे सांसदों में आते हैं वह m.a. में इंग्लिश है वहीं उन्होंने B.ed भी किया है अगर कोचर बिहार लोकसभा सीट के सांसद की बात की जाए तो दिसंबर 2018 तक यहां के सांसद ने केवल 8 डिबेट में भाग लिया है। वही कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के पटल पर नहीं रखा है। यहां से केवल 27 सवाल ही पूछे गए हैं और लोकसभा में उपस्थिति 77 फ़ीसदी रही है। देखना है अब किसकी सरकार बनती हैं।












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