लोकसभा चुनाव 2019: बैतूल लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश की बैतूल लोकसभा सीट से सांसद भाजपा की ज्योति धुर्वे हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय शाह को 32,86,14 वोटों से हराकर ये सीट अपने नाम की थी। आपको बता दें कि बैतूल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 आप और 4 पर कांग्रेस थी, उस साल यहां कुल मतदाताओं की संख्या 16,07,822 थी, जिसमें से मात्र 10,47,719 लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 5,74,150 और महिलाओं की संख्या 4,73,569 थी।

profile of Betul lok sabha constituency

बैतूल लोकसभा सीट का इतिहास

बैतूल लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें आती हैं। साल 1967 में बैतूल संसदीय सीट के बनने के बाद इस पर कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन बाद के 7 चुनाव जीतकर भाजपा ने इसे अपना गढ़ बना लिया। पहले यह सीट छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा थी। कांग्रेस के नरेंद्र कुमार साल्वे यहां के पहले सांसद बने थे। 1971 में वे दोबारा जीते, इसके बाद 1977 में भारतीय लोक दल के सुभाष चंद्र आहूजा, 1980 में कांग्रेस के गुफरान आजम, 1984 में कांग्रेस के ही असलम शेर खान यहां से चुने गए। 1989 में पहली बार भाजपा का कब्जा हुआ और आरिफ बेग सांसद बने, लेकिन 1991 में कांग्रेस के असलम शेर खान फिर जीत गए। 1996 के चुनाव में भाजपा के विजय खंडेलवाल सांसद बने। इसके बाद कांग्रेस को यहां से मौका नहीं मिला। मौजूदा सांसद ज्योति धुर्वे लगातार दो बार से यहां के सांसद की सीट पर विराजमान हैं।

ज्योति धुर्व का लोकसभा में प्रदर्शन

ज्योति धुर्व के ऊपर फर्जी जाति बताने का आरोप लग चुका है, ज्योति धुर्वे आदिवासियों के लिए सुरक्षित बैतूल लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार भाजपा सांसद चुनी गई हैं। 2009 में जब पहली बार वे लोकसभा चुनाव जीती थीं तभी उनकी जाति को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन तब 5 साल के भीतर इस मामले की जांच नहीं हो पाई थी, इसलिए वह शिकायत स्वत: खारिज हो गई थी। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 84 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 64 डिबेट में हिस्सा लिया है और 229 प्रश्न पूछे हैं।

बैतूल एक परिचय- प्रमुख बातें-

मध्य प्रदेश के दक्षिण में स्थित बैतूल जिले का अपना एक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, यहां पर लंबे वक्त तक मराठाओं और अंग्रेजों ने राज किया है। बैतूल जिला नर्मदा संभाग के अंतर्गत आता था। यहां का प्रसिद्ध ताप्ती मंदिर भी आस्था का केंद्र है, जहां सैकड़ों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। बैतूल की कुल आबादी 24 लाख 59 हजार 626 है, जिसमें से 81 प्रतिशत लोग गांवों में और 18 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। यहां की 95 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म में भरोसा करते हैं, जबकि मात्र 2 प्रतिशत आबादी इस्लाम को मानने वाली हैं।

गौरतलब है कि इस सीट पर लंबे वक्त से भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस जीत के लिए तरस रही है, फिलहाल राज्य के सियासी हालात काफी बदल गए हैं, शिवराज सरकार सत्ता से गायब हो चुकी है तो वहीं राज्य में कांग्रेस की हुकूमत है, ऐसे में इस सीट पर भाजपा को कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल सकती है, जहां उसका प्रयास इस सीट को बचाने के लिए होगा वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की जी-तोड़ कोशिश इस सीट को जीतने की होगी,देखते हैं शह-मात के इस खेल में जीत का सेहरा किसके सिर सजता है।

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