"मेरे पहले भाषण से बेहतर", सांसद प्रियंका गांधी के लोकसभा में पहले भाषण पर खुश हुए राहुल गांधी
Priyanka Gandhi maiden speech in Lok Sabha: वायनाड से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद शुक्रवार के प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अपना पहला भाषण दिया। प्रियंका गांधी के संसद में पहले भाषण पर सांसद भाई राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और अपनी छोटी बहन की जमकर सराहना की है।
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राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी के भाषण को संसद में अपने पहले भाषाण से बेहतर बताया। याद रहे भाई राहुल गांधी ने वायनाड और रायबरेली दोनों लोकसभा सीटों से चुनाव जीता था। जिस कारण उन्होंने वायनाड की सांंसदी छोड़ने का निर्णय लिय था। जिस कारण वायनाड की खाली सीट पर हाल ही में उपचुनाव हुए जिसमें प्रियंका गांधी ने रिकार्ड तोड़ जीत हासिल कर सांसद बनी हैं।

प्रियंका गांधी ने सांसद बनने के बाद आज 13 दिसंबर को लोकसभा में सांसद के तौर पर अपना पहला भाषण दिया। संसद में एक शक्तिशाली संबोधन में, केरल के वायनाड से नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी ने आरक्षण और जाति जनगणना की मांग से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।
मोदी सरकार पर संविधान को कमजोर करने का लगाया आरोप
प्रियंका गांधी ने बाबासाहेब अंबेडकर के महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए मौजूदा भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संविधान को कमजोर करने के कथित प्रयासों पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ पार्टी, अपनी लोकसभा सीटों में कमी के बाद, संविधान के बारे में अधिक मुखर हो गई है। उन्होंने कहा भाजपा संघ (आरएसएस) की विचारधारा का पालन कर रही है।
मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की
प्रियंका गांधी ने सरकार की नीतियों जमकर आलोचना की। खास तौर पर लैटरल एंट्री स्कीम पर निशाना साधते हुए कहा उद्देश्य आरक्षण प्रयासों को कमजोर करना है।
जाति जनगणना
प्रियंका जाति जनगणना के लिए अपनी पार्टी के आह्वान को दोहराया, तर्क दिया कि निष्पक्ष और सूचित नीतियां बनाने के लिए यह आवश्यक है। जाति-आधारित जनगणना की मांगों से निपटने के सरकार के तरीके की उन्होंने अलोचना की।
अडानी को लेकर मोदी सरकार को घेरा
प्रियंका गांधी ने संसद में उद्योगपति अडानी के खिलाफ आरोपों को संबोधित करने में सरकार की अनिच्छा के बारे में भी चिंता जताई और आम जनता की कीमत पर बड़ी कंपनियों के प्रति पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के इस पक्षपात रवैये के कारण राष्ट्रीय संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों को हस्तांतरित हो गई, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा।












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