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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने कार्यकाल में इन की दया याचिका को किया खारिज, जानिए कौन-कौन हैं

नई दिल्ली, 07 जुलाई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति ने छह दया याचिकाओं को खारिज किया है। जिसमे 2012 के दिल्ली निर्भया गैंगरेप के दोषियों समेत बिहार में सामूहिक नरसंहार के हत्यारे शामिल हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह की दया याचिका अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित है, माना जा रहा है कि उसकी दया याचिका अगले राष्ट्रपति के सामने पेश की जाएगी। देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव इसी महीने 18 तारीख को होना है। एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की ओर से यशवंत सिंह मैदान में हैं।

राष्ट्रपति कोविंद ने खारिज की अहम दया याचिकाएं

राष्ट्रपति कोविंद ने खारिज की अहम दया याचिकाएं

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कार्यकाल के दौरान उनके पास सबसे पहली दया याचिका जगत राय की आई थी, जोकि हत्या का दोषी है। उसने 2006 में बिहार के वैशाली जिले में स्थित रामपुर श्यामचंद्र गांव में एक घर में आग लगा दी थी, जिसमे विजेंद्र महतो के पांच बच्चे और पत्नी जलकर मर गए थे। सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने राय की हत्या के फैसले को बरकरार रखा था। कोर्ट ने परिवार के छह सदस्यों की हत्या को दुर्लभतम से दुर्लभतम अपराध माना था और फांसी की सजा को खत्म करने से इनकार कर दिया था।

संविधान के तहत अधिकार

संविधान के तहत अधिकार

बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत देश के राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि वह किसी भी फांसी की सजा के दोषी की सजा को माफ कर सकते हैं। 2020 में राष्ट्रपति कोविंद ने मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दया देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद इन सभी निर्भया हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा हो गई थी। इन पांचों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में 2013 को सुनवाई शुरू हुई थी।

निर्भया के मुख्य आरोपी ने लगा ली थी खुद फांसी

निर्भया के मुख्य आरोपी ने लगा ली थी खुद फांसी

निर्भया हत्याकांड के मुख्य आरोपी राम सिंह ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, उसने तिहाड़ जेल में खुद को फांसी लगा ली थी। वहीं एक नाबालिग आरोपी को बाल सुधार ग्रह में रखा गया था। राष्ट्रपति के सचिवालय के अनुसार आखिरी दया याचिका जिसे राष्ट्रपति ने खारिज किया था वह जुलाई 2020 में संजय की थी। उसे जुलाई 2006 में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

प्रणब मुखर्जी ने 30 दया याचिका को खारिज किया

प्रणब मुखर्जी ने 30 दया याचिका को खारिज किया

वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बात करें तो उन्होंने 30 दया याचिकाओं को खारिज किया था। जबकि सिर्फ 4 को माफी दी थी। इसमे अजमल कसाब, मोहम्मद अफजल गुरू, याकूब मेनन के नाम शामिल हैं जिनकी दया याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज किया था। प्रणब मुखर्जी के नाम सर्वाधिक दया याचिका खारिज करने का रिकॉर्ड है। प्रणब मुखर्जी से पहले आर वेंकटरमण ने बतौर राष्ट्रपति सबसे अधिक 45 दया याचिका को खारिज किया था।

प्रतिभा पाटिल ने पांच की दया याचिका खारिज की

प्रतिभा पाटिल ने पांच की दया याचिका खारिज की

पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन की बात करें तो उन्होंने एक भी दया याचिका पर अपने कार्यकाल में फैसला नहीं दिया। नारायणन के बाद राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने दो दया याचिकाओं पर अपना फैसला दिया। देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल में 34 दया याचिकाओं पर फैसला दिया और सिर्फ 5 को खारिज किया। सरकार के पास तीन दया याचिका 2015 से लंबित हैं, जबकि 2 दया याचिका गृह मंत्रालय के पास 2021 से लंबित है।

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