भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई विश्वास की कुंजी: राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के सतर्कता जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक प्रगति में बाधा नहीं डालता, बल्कि समाज में विश्वास और भाईचारे को भी कमजोर करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि भ्रष्ट लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है बल्कि यह ईमानदार लोगों में शासन के प्रति भरोसा भी बढ़ाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाई संदेह या द्वेष से प्रेरित नहीं होनी चाहिए, बल्कि न्याय और समानता पर आधारित होनी चाहिए।

भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए सरकार की पहलों का उल्लेख
राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सरकार की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और ई-टेंडरिंग जैसी पहलों का जिक्र किया। इन उपायों से सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुई हैं। उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पिछले एक दशक में 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति जब्त करने का भी उल्लेख किया।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह और निवारक सतर्कता अभियान
इस वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह का विषय "राष्ट्र की समृद्धि के लिए ईमानदारी की संस्कृति" रखा गया था और यह 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मनाया गया। इसके साथ ही केंद्र सरकार के मंत्रालयों और संगठनों ने 16 अगस्त से 15 नवंबर तक तीन महीने का निवारक सतर्कता अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना, प्रणालीगत सुधार करना और डिजिटल उपस्थिति को बढ़ावा देना है।
केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की उपस्थिति और सार्वजनिक प्रशासन में सुधार
कार्यक्रम में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और सतर्कता आयुक्त ए एस राजीव भी मौजूद थे। इस अभियान का उद्देश्य न केवल भ्रष्टाचार को समाप्त करना है बल्कि शासन को सुदृढ़ बनाना और सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस संदेश से स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए हर स्तर पर सतर्कता और ईमानदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा, जिससे समाज में विश्वास का माहौल बने और राष्ट्र प्रगति की दिशा में आगे बढ़े।












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