राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तेज बारिश में वीर सपूतों को किया सेल्यूट, VIDEO देख लोग बोले- शानदार,अतुलनीय
President Draupadi Murmu viral video: भारत के सर्वोच्च संवैधिानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो जमकर लोगों द्वारा शेयर कर उनके देशप्रेम के जज्बें को लोग सेल्यूट कर रहे हैं।
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जब 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंची तो तेज बारिश हो रही थी। उन्होंने भारी बारिश की परवाह किए बिना राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर देश के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति के साथ इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित थे लेकिन वो दूर छतरी के नीचे नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में द्राैपदी मुर्मू तेज बारिश में भीगते हुए शहीदों को सेल्यूट करती हुई दिख रही हैं। उनके ऊपर कोई छतरी भी नहीं है। वो तीनों सेनाओं के प्रमुखों और सेना के जवानाें के संग भारी बारिश में देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति मुर्मू का ये वीडियो शेयर कर उनकी तारीफ करते हुए सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति बता रहे हैं। वहीं यूजर्स देश के वीर शहीदों के प्रति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ये समर्पण और सम्मान देखकर गदगद होकर उन्हें सच्चा देश प्रेमी बोल रहे हैं। एक यूजर ने लिखा ऐसे क्षण में राष्ट्रपति को शानदार सलामी,उन्होंने छाता नहीं मांगा।"एक सचमुच महान राष्ट्रपति जो बारिश में सिर झुकाकर श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। उनके द्वारा दिया जाने वाला सम्मान अतुलनीय है।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि "हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस, सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं। हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा था कि "15 अगस्त की तारीख, हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है। औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के दौरान देशवासियों की अनेक पीढ़ियों ने यह सपना देखा था कि एक दिन देश स्वाधीन होगा।"












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