Premanand Ji Darshan: दिन में 3 बार होंगे प्रेमानंद जी के दर्शन, सुबह की पदयात्रा के अलावा कब-कब मिलेगा मौका?
Premanand Ji Maharaj Darshan: वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। देश-दुनिया से हर दिन हजारों श्रद्धालु राधा रानी के इस अनन्य भक्त की एक झलक पाने के लिए वृंदावन की गलियों में घंटों इंतजार करते हैं। क्रिकेट से लेकर फिल्मी सितारे तक प्रेमानंद जी के सानिध्य के लिए केलि कुंज पहुंचते हैं।
हाल ही में महाराज जी की पदयात्रा (Night Padyatra) को लेकर कुछ बड़े अपडेट्स सामने आए हैं। ये उन श्रद्धालुओं के लिए जानना बेहद जरूरी है जो आने वाले दिनों में दर्शन की योजना बना रहे हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा के समय और मार्ग में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके साथ ही साथ दिन में दो बार और प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन अब संभव हैं।

पदयात्रा का नया समय: अब 2:30 बजे नहीं होंगे दर्शन (Premanand Ji Padayatra Timing)
महाराज जी की पदयात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव इसके समय में हुआ है। नई टाइमिंग कुछ इस प्रकार हैं-
पुराना समय: पहले पदयात्रा रात करीब 2:00 या 2:30 बजे शुरू होती थी।
नया समय: अब महाराज जी की पदयात्रा सुबह 4:00 बजे के आसपास शुरू होती है।
कारण: महाराज जी के स्वास्थ्य (Health Update) और बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आश्रम प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
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पदयात्रा का नया रूट और शुरुआत का स्थान
पदयात्रा के मार्ग में भी छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
प्रारंभिक स्थान: अब पदयात्रा 'श्री कृष्णम शरणम सोसाइटी' से लगभग 100 से 150 मीटर आगे से शुरू हो रही है।
मुख्य मार्ग: पहले महाराज जी एनआरआई ग्रीन कॉलोनी वाले रास्ते से निकलते थे, लेकिन अब वे प्रेम मंदिर के सामने वाले मुख्य मार्ग से होते हुए अपने आश्रम 'श्री राधा केली कुंज' तक पहुंचते हैं।
दूरी: यह यात्रा लगभग 2 किलोमीटर की होती है, जहां सड़क के दोनों ओर श्रद्धालु दर्शन के लिए खड़े रहते हैं।
दिन में 2 बार और हो सकते हैं प्रेमानंद जी के दर्शन (Premanand Ji Darshan Three Times a Day)
सुबह की पदयात्रा के अलावा अब श्रद्धालुओं के पास दिन में 2 और मौके हैं प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन करने के लिए। दरअसल, हर दिन दोपहर 2 से 3 बजे के बीच प्रेमानंद जी प्रेम मंदिर के सामने वाले रास्ते से, यमुना जी के किनारे से होते हुए यमुना तट पर साधना के लिए जाते हैं। शाम 5 से 6 बजे के बाच महाराज जी उसी रास्ते से वापस आ कर प्रेम मंदिर से आगे स्थित आश्रम में जाते हैं।
साधना के लिए महाराज जी गाड़ी से जाते हैं लेकिन वापस वो पैदल लौटते हैं। तो अगर आप सुबह-सुबह प्रेमानंद जी की पदयात्रा में शामिल नहीं हो पाते हैं तो आप दिन में 2 और बार प्रेमानंद जी के दर्शन कर सकते हैं।
स्वास्थ्य और दर्शन पर ताजा अपडेट (दिसंबर 2025)
अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान महाराज जी का स्वास्थ्य कुछ नरम रहा था, जिसके कारण कुछ समय के लिए पदयात्रा स्थगित भी की गई थी। हालांकि, अब वे स्वस्थ हैं और नियमित रूप से दर्शन दे रहे हैं।
नोट: आश्रम की ओर से अपील की गई है कि श्रद्धालु सोशल मीडिया पर चल रही महाराज जी के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी भ्रामक खबर पर विश्वास न करें।
🎟️ दर्शन के लिए जरूरी नियम और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
यदि आप प्रेमानंद जी महाराज से व्यक्तिगत मिलना चाहते हैं या सत्संग में बैठना चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन करें:
टोकन सिस्टम: एकांतिक वार्तालाप और सत्संग के लिए टोकन अनिवार्य है। इसके लिए आपको आधार कार्ड (Aadhaar Card) लेकर आश्रम जाना होगा।
रजिस्ट्रेशन का समय: टोकन आमतौर पर दर्शन से एक दिन पहले सुबह 9:00 से 10:00 बजे के बीच बांटे जाते हैं।
निशुल्क सेवा: महाराज जी के दर्शन या किसी भी प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। किसी भी ठग या बिचौलिए से सावधान रहें।
आश्रम का पता:
श्री हित राधा केली कुंज, परिक्रमा मार्ग, रमण रेती, वृंदावन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Premanand Ji related FAQs)
- 1. क्या पदयात्रा हर रोज होती है?
हां, सामान्यतः महाराज जी हर रोज पदयात्रा करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य या विशेष पर्वों पर इसमें बदलाव संभव है।
- 2. दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?
पदयात्रा दर्शन के लिए सुबह 3:30 बजे तक मार्ग पर पहुंचना उचित है। सत्संग के लिए सुबह 7:00 से 10:00 और शाम 5:00 से 8:00 बजे का समय निर्धारित है।
- 3. क्या ऑनलाइन टोकन मिलता है?
नहीं, वर्तमान में कोई भी विश्वसनीय ऑनलाइन बुकिंग सेवा उपलब्ध नहीं है। आपको खुद से आश्रम जाकर ही रजिस्ट्रेशन कराना होगा।












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