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Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ में अरबपति महिलाएं, सुधामूर्ति का प्रवास तो लॉरेन पॉवेल जॉब्स करेंगी कल्पवास

Billionaire women in Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ दुनियाभर से साधु संतों, आम जन के अलावा कई अरबतियों और वीवीआईपी राजनेता भी पहुंच रहे हैं। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम तट पर पवित्र स्नान के महापर्व में एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल के अलावा इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष व समाजसेविका सुधा मूर्ति और बीजेपी सांसद व एक्ट्रेस हेमा मालिनी महाकुंभ में पहुंचने वाली हैं।

विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन में दुनिया की जिन अरबपति महिलाओं के लिए संगम की रेती पर महाराजा डीलक्स के अलावा अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉटेज लगाए जा रहे हैं। जिसमें भारत की जानी मानी हस्तियों को अलावा विदेश से भी अरबपति पहुंच रहे हैं।

Billionaire women in Mahakumbh

पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स की अरबपति पत्नी पहुंचेंगी महाकुंभ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एप्पल के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स की अरबपति विधवा लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी महाकुंभ में 'कल्पवास' में भाग लेंगी। उनके 13 जनवरी को मेले में आने की उम्मीद है और वे 29 जनवरी तक निरंजनी अखाड़े के 'महामंडलेश्वर' स्वामी कलियाशानंद के शिविर में रहेंगी। लॉरेन के बारे में बताया जाता है कि वे 'संगम' में पवित्र स्नान करेंगी और धार्मिक प्रवचन में भाग लेंगी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, पीट बटिगिग और कमला हैरिस जैसी हस्तियों के राजनीतिक-सामाजिक अभियानों में हिस्सा ले चुकीं हैं।

लॉरेन महाकुंभ के शुभारंभ के दिन आएंगी। उनके ठहरने की व्यवस्था निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद के शिविर में की गई है। वह 29 जनवरी तक उनके शिविर में रहकर सनातन धर्म को समझेंगी। वह कैलाशानंद के शिविर में 19 जनवरी से शुरू हो रही कथा की पहली यजमान भी होंगी। लॉरेन पॉवेल जॉब्स एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स के निधन के बाद विरासत में मिली 25 बिलियन डॉलर की संपत्ति के मालकिन हैं।

स्वामी अवधेशानंद के शिविर में हेमा मालिनी का कॉटेज
महाकुंभ में विख्यात सिने तारिका और सांसद हेमामालिनी भी डुबकी लगाएंगी। हेमामालिनी जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के शिविर में प्रवास करेंगी। वह संगम में डुबकी भी लगाएंगी।

सुधा मूर्ति का महाकुंभ प्रवास
इंफोसिस फाउंडेशन के संस्थापक नारायण मूर्ति की अरबपति पत्नी विख्यात समाजसेविका सुधामूर्ति भी आ रही हैं। सुधामूर्ति के लिए उल्टा किला के पास कॉटेज तैयार किया जा रहा है। इनके अलावा ओपी जिंदल समूह की चेयरपर्सन रहीं सावित्री देवी जिंदल के लिए स्वामी अवधेशानंद और चिदानंद मुनि के शिविरों में ठहरने की व्यवस्था की गई है।

क्या है कल्पवास?
'कल्पवास' शब्द प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं से निकला है, जो हिंदू परंपरा में अंतर्निहित सदियों पुरानी प्रथा को दर्शाता है। 'कल्प' एक लंबी अवधि को दर्शाता है, जबकि 'वास' का अर्थ है निवास करना। यह अवधि आम तौर पर हिंदू कैलेंडर के 'माघ' (जनवरी-फरवरी) महीने के दौरान आती है, जो तपस्या, भक्ति और समुदाय के समय को दर्शाती है। 'कल्पवासी' एक अनुशासित जीवन जीते हैं, जो भोर से पहले पवित्र नदी में डुबकी लगाकर अपना दिन शुरू करते हैं, उसके बाद ध्यान, पूजा और धार्मिक उपदेशों में भाग लेते हैं।

कल्पवास भारत की प्राचीन परंपरा
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और बिहार के गांवों के लोग, जिन्हें सामूहिक रूप से 'कल्पवासी' कहा जाता है, कड़ाके की ठंड में रेतीले तटों पर पूरा महीना बिताते हैं। इस दौरान विभिन्न संतों और ऋषियों के शिविरों में जाकर प्रवचन सुनना और 'भजन और कीर्तन' (धार्मिक गीतों का गायन) में भाग लेना शामिल है। यह सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे हिंदु धर्म के अनुयायी आगे बढ़े रहे हैं। कल्पवास एक अनुशासित जीवन शैली का प्रतीक है जिसमें पवित्र नदी में सुबह-सुबह स्नान, ध्यान, पूजा और धार्मिक प्रवचनों में शामिल होना शामिल है।

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