प्रद्युम्न मर्डर केस: बस कंडक्टर अशोक कर रहा है सब्जी बेचने की तैयारी

नई दिल्ली। गुरुग्राम के भोंडसी स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में छात्र प्रद्युम्न की हत्या के आरोप गिरफ्तार किए गए और अब जमानत पर बाहर अशोक परिवार चलाने के लिए सब्जी बेचने की तैयारी कर रहा है। रायन स्कूल में बस कंडक्टर अशोक को आठ सितंबर को स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युम्न की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच सीबीआई के पास गई तो सीबीआई की टीम ने पाया कि अशोक पर लगे आरोप गलत और मनगढ़ंत हैं, हत्या अशोक ने नहीं बल्कि स्कूल के ही एक दूसरे छात्र ने की है। सीबीआई की रिपोर्ट पर अशोक को कोर्ट से जमानत मिल गई। सीबीआई ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार किया, जो अभी जेल में है और उस पर केस चल रहा है। अशोक का कहना है कि उसे हरियाणा पुलिस ने इतना मारा-पीटा कि अब वो मेहनत का कोई काम नहीं कर पाएगा, ऐसे में उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था।

सब्जी बेचकर पेट पालूंगा: अशोक

सब्जी बेचकर पेट पालूंगा: अशोक

अशोक का कहना है कि आठ सितंबर के बाद उसकी जिंदगी ही बदल गई। उसने कहा कि पहले वो कंडक्टर के तौर पर 4000 रुपए जबक पत्नी उसी स्कूल में 2500 रुपए की नौकरी कर रही थी। घटना के बाद दोनों की नौकरी छूट गई। गिरफ्तारी के बाद मारपीट की वजह से अशोक की सेहत भी काफी कमजोर हो गई है। उसका कहना है कि अब ना घर चलाने के लिए पैसा है और ना बच्चों की फीस के लिए। अशोक ने बताया कि बच्चों की फीस और उसका इलाज भी गांव के लोगों ने चंदा कर किया है। ऐसे में अब वो सब्जी बेचकर घर चलाने की सोच रहा है।

अशोक की मुआवजे की याचिका को कोर्ट ने ठुकराया

अशोक की मुआवजे की याचिका को कोर्ट ने ठुकराया

अशोक ने मुआवजा के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दी थी, जिसे बीते हफ्ते कोर्ट ने ठुकरा दिया। जस्टिस सूर्य कांत व जस्टिस सुधीर मित्तल ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अशोक कुमार को अभी तक इस मामले से बरी नहीं किया गया है और ना ही उसे दोषमुक्त करार दिया गया है, लिहाजा अभी उसे पुलिस द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित करने वा टॉर्चर करने के चलते मुआवजा देने की मांग जायज नहीं है, अभी भी इस मामले की जांच चल रही है। अशोक कुमार के हित में एक पीआईएल दायर की गई थी, यह पीआईएल एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने दायर की थी।

अशोक मानसिक रूप से भी परेशान

अशोक मानसिक रूप से भी परेशान

जमानत पर रिहा होने के बाद अशोक ने कहा था, 'मैं पिछले दो महीनों जेल में था, लेकिन डेढ़ महीने तक मुझे सोने के लिए बेडशीट तक नहीं दी कि कहीं मैं फांसी ना लगा लूं। मैंने जेल में दो महीने से टीवी नहीं देखी थी। मुझे नहीं पता है कि इस मामले में बाहर क्या हो रहा है।' अशोक की पत्नी ममता ने बताया कि पुलिस ने उसे मारा, उल्टा लटकाया और प्रद्युम्न की हत्या कबूल कराने के लिए उसे टॉर्चर किया।

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