बिजली संकट: Coal India ने लिया बड़ा फैसला, इन सबकी सप्लाई रोकी- रिपोर्ट

कोलकाता, 14 अक्टूबर: बिजली संयंत्रों को कोयले की सप्लाई बाधित ना हो, इसके लिए कोल इंडिया ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत वह फिलहाल सिर्फ इन्हीं कंपनियों को कोयला आपूर्ति करने पर फोकस करेगी और बाकी उपभोक्ताओं की सप्लाई अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से कुछ राज्य सरकारें दावा कर रही हैं कि कई बिजली प्लांट के पास कोयले का स्टॉक नहीं बचा है, जिससे बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो रही है। सबसे ज्यादा दिल्ली सरकार परेशान है, जो पिछले हफ्ते भर से लगातार एक या दो दिनों का ही कोयला बचे होने का दावा कर रही है। हालांकि, केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि ना तो कोयले की कमी है और ना ही बिजली उत्पादन को प्रभावित होने दिया जाएगा।

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    गैर-विद्युत उपभोक्ताओं को कोयले की आपूर्ति रोकी- रिपोर्ट

    गैर-विद्युत उपभोक्ताओं को कोयले की आपूर्ति रोकी- रिपोर्ट

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कोल इंडिया लिमिटेड के एक अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि इसने अपने गैर-विद्युत उपभोक्ताओं को कोयले की आपूर्ति अस्थाई तौर पर रोक दी है। गौरतलब है कि भारतीय बिजली कंपनियां इस वक्त भयंकर कोयला संकट झेल रही हैं, जिसकी वजह से विद्युत उत्पादन प्रभावित होने की खबरें हैं। बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। कोल इंडिया की इस योजना से जुड़े सूत्र के हवाले से रॉयटर्स ने कहा है, 'स्टॉक में स्थिरता बहाल होने तक बिजली संयंत्रों को आपूर्ति में अस्थायी प्राथमिकता है।' हालांकि, कंपनी की ओर से खबर लिखे जाने तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिल पाई है।

    'हम अब सुधार देख रहे हैं- कोयला मंत्री

    'हम अब सुधार देख रहे हैं- कोयला मंत्री

    इससे पहले गुरुवार को ही कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि कुछ कोयला खदान बंद होने और कुछ में मानसून के चलते पानी भरे होने के चलते यह संकट पैदा हुआ है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है और स्थिति बेहतर हो रही है। झारखंड के चतरा जिले के पिपरवार में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की अशोक खदान का दौरा करने गए जोशी ने कहा कि देश में बिजली संयंत्रों को आवश्यक मात्रा में कोयला पहुंचता रहेगा। मौजूदा हालात पर वे बोले कि 'हम अब सुधार देख रहे हैं।' उन्होंने कोयला संकट पर सीसीएल और ईसीएल (ईस्टर्न कोल्डफील्ड लिमिटेड) से भी चर्चा भी की है। उन्होंने ज्यादा कोयला उत्पादन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 'हम प्रतिदिन 20 लाख टन कोयले का उत्पादन कर सकते हैं।'

    दिल्ली सरकार ने किया है बिजली संकट का दावा

    दिल्ली सरकार ने किया है बिजली संकट का दावा

    9 अक्टूबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर दावा किया था कि कोयले की किल्लत की परिस्थिति की वजह से उन विद्युत संयत्रों पर असर पड़ा है, जो दिल्ली को बिजली आपूर्ति करते हैं। उन्होंने पीएम मोदी से यह भी कहा था कि इस मामले में दखल दें। इसके बाद ऊर्जा मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि देश में बिजली संयंत्रों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त कोयला उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने एनटीपीसी और डीवीसी (दामोदर वैली कॉर्पोरेशन) को भी निर्देश दिए थे कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बिजली की आपर्ति में कमी ना रहने पाए।

    दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है भारत

    दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है भारत

    बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है, जिसके पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार है। लेकिन, जिस तरह से बिजली की मांग देश में कोरोना से पहले वाली स्थिति में लौटने लगी है, वह अर्थव्यवस्था के लिए तो शुभ संकेत है, लेकिन कोयला कंपनियों के पास इतना स्टॉक मौजूद नहीं है कि वह बिजली कंपनियों की बढ़ती मांग को पूरा कर सकें। यह एक ऐसा संकट आया है, जिससे चीन और यूरोप के देश भी जूझ रहे हैं और आने वाले दिनों में अमेरिका की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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