मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा जयललिता की मूर्ति अनावरण का मामला, DMK ने बताया काला दिन

सोमवार को तमिलानाडु विधानसभा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल द्वारा दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मूर्ति का अनावरण किया गया

नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा में दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की मूर्ति के अनावरण का मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई मंगलवार को करेगा। जब सोमवार को विधानसभा में जयललिता की मूर्ति का अनावरण किया जा रहा था तब उस कार्यक्रम में कांग्रेस और डीएमके नेता शामिल नहीं हुए थे। डीएमके और कांग्रेस ने जयललिता की मूर्ति के अनवारण की यह कहते हुए विरोध किया कि ऐसी महिला की मूर्ति को विधानसभा में नहीं लगाया जा सकता जिसके दामन पर भ्रष्टाचार के दाग हो। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने इस दिन को तमिलनाडु विधानसभा के इतिहास का काला दिन बताया है।

 दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मूर्ति का अनावरण किया गया

दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मूर्ति का अनावरण किया गया

सोमवार को तमिलानाडु विधानसभा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल द्वारा दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मूर्ति का अनावरण किया गया। इस दौरान तमिलनाडु के सीएम पलानीसामी और डिप्टी सीएम पन्नीरसेल्वम भी मौजूद रहे। अनावरण के एक घंटे बाद ही डीएमके ने मद्रास हाई कोर्ट ने में मूर्ति हटाए जाने की अपील दायर कर दी। डीएमके का तर्क है कि जयललिता को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया था। ऐसे में उनकी मूर्ति का अनावरण विधानसभा में नही किया जाना चाहिए।

बीजेपी ने किया समर्थन

बीजेपी ने किया समर्थन

डीएमके ने मूर्ति लगाने के फैसले को एकतरफा और मनमाना बताते हुए नैतिकता के खिलाफ बताया है। कांग्रेस और लेफ्ट के नेता भी जयललिता की मूर्ति के अनावरण के खिलाफ है। हालांकि बीजेपी ने मूर्ति के अनावरण का विरोध नहीं किया है। बीजेपी का कहना है कि जयललिता ने सामाजिक काम किए थे और मौत के वक्त वो जमानत पर थी। ऐसे में विरोध ठीक नहीं है।

जयललिता पर करप्शन के आरोप

जयललिता पर करप्शन के आरोप

डीएमके की ओर से कोर्ट से मांग की कि इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। याचिका के मुताबिक, जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोप में स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया था, लेकिन इस फैसले को बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने पलट दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता और अन्य को दोषी पाया था। जयललिता की मौत हो जाने की वजह से उन्हें सजा नहीं सुनाई गई लेकिन अन्य आरोपियों को 4 साल की सजा, 100 करोड़ रुपये जुर्माना और उनकी संपत्तियां जब्त किए जाने की आदेश कोर्ट ने दिया। ऐसे स्थिति में डीएमके ने पहले ही हाई कोर्ट में याचिका दायर की है कि सरकारी दफ्तरों, बिल्डिंग्स, पीएसयू और सरकारी योजनाओं से जयललिता का नाम और तस्वीरें हटाई जाएं। मामला अभी कोर्ट में है।

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