सरदार, पटेल और मोदी का पॉलिटिकल कनेक्शन

1. मोदी-पटेल कनेक्शन
नरेंद्र मोदी ने पिछले साल घोषणा की कि देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की लोहे की मूर्ति बनाने के लिये वो देश के हर कोने से लोहा बटोरेंगे। हर सभा, हर रैली और हर कार्यक्रम में वो पटेल का नाम लेना नहीं भूलते हैं। इसका मुख्य कारण है जनता की नजर में कांग्रेस को नीचा दिखाना। क्योंकि इतिहास गवाह है कि जवाहर लाल नेहरू सरदार पटेल को पसंद नहीं करते थे। तमाम इतिहासकार कहते हैं कि अगर नेहरू व अन्य कांग्रेसी जिद नहीं करते, तो सरदार पटेल ही देश के पहले प्रधानमंत्री होते। इसी प्वाइंट को उठाकर मोदी जनता को यह जताने की कोशिश करते हैं, कि कांग्रेस के लिये पटेल की कोई अहमियत नहीं। चूंकि गुजरात के इतिहास में पटेल की अद्वितीय भूमिका है, लिहाजा लोग इसी बात की वजह से कांग्रेस के करीब नहीं जाते।
2. सरदार-मोदी कनेक्शन
आज के कार्यक्रम को लेकर मोदी और सरदार मनमोहन सिंह में गजब का पॉलिटिकल कनेक्शन है। आपको बता दें कि जब इस म्यूजियम के उद्घाटन समारोह का निमंत्रण आया, और यह कहा गया कि कार्यक्रम में मोदी भी आ रहे हैं, तो मनमोहन को विश्वास नहीं हुआ। जब आयोजन समिति के अध्यक्ष दीनशॉ पटेल खुद पीएम के पास कार्ड लेकर पहुंचे और उसमें मोदी का नाम दिखाया, तब मनमोहन कार्यक्रम में आने के लिये राजी हुए। असल में पहले मनममोहन इस कार्यक्रम में आने से इसलिये कतरा रहे थे, क्योंकि प्रोटोकॉल के तहत सरकारी कार्यक्रम में अगर पीएम उपस्थित हैं, तो सीएम की उपस्थिति भी अनिवार्य होती है। मनमोहन का डर था कि कांग्रेस विरोधी होने के चलते मोदी कार्यक्रम में नहीं आयेंगे और तब जो बेइज्जती महसूस होगी, वो अच्छी नहीं होगी। लेकिन जब मोदी का कनफरमेशन मिल गया, तब कांग्रेस के सरदार खुश हुए और हामी भर दी।
3. सरदार-पटेल कनेक्शन
सरदार मनमोहन सिंह और सरदार पटेल के बीच वैसे तो कोई डायरेक्ट कनेक्शन नहीं है, लेकिन अगर गुजरात के वोटों को हासिल करना है, तो अभी से ही यह कनेक्शन जोड़ना होगा। गुजरात के लिये सरदार पटेल से बढ़कर कोई नेता नहीं, लिहाजा अगर गुजरातियों के वोट चाहिये तो नई रणनीति के साथ काम करना होगा। ऐसी रणनीति जो मोदी के पटेल फैक्टर को निष्क्रिय कर दे। कांग्रेस गुजरात की विकास गाथा तो नहीं गा सकती, लेकिन सरदार पटेल के नाम पर तो कुछ कर ही सकती है।












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