नोटबंदी से पुलिस की चांदी, रिश्वत में ले रहे पूरा 500 का नोट

एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि पुलिस वाले 500 के पुराने नोट तो रिश्वत में ले लेते हैं, लेकिन वापस एक भी पैसा नहीं देते।

नई दिल्ली। नोटबंदी के फैसले के बाद से बिजनेस में काफी कमी आ गई है, जिसके चलते तुगलकाबाद में इनलैंड कंटेनर डिपो में बहुत से ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक यूं ही खड़े छोड़ दिए हैं। आयशर ट्रक चलाने वाले सतपाल सिंह ने डिपो पर खड़े रह कर अगले ऑर्डर का इंतजार किया। उन्होंने बताया कि पिछली रात उन्होंने 5 टन कपड़े दाबरी से तुगलकाबाद ट्रांसपोर्ट किए, जहां से उन्हें ट्रेन के जरिए मुंबई भेजा जाएगा और फिर वहां से वो जहाज के जरिए दुबई भेजे जाएंगे।

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उन्होंने कहा- यूं तो हम 7-10 दिन के अंदर देश में 2 चक्कर लगाते थे, लेकिन अब सिर्फ एक लगा पा रहे हैं। मालिकों और ड्राइवरों के लिए बिजनेस आधा हो गया है। पहले हम हर महीने ट्रक से 50 हजार रुपए की आमदनी करते थे, लेकिन यह कमाई आधी हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि पुलिसवालों को रिश्वत देने में भी उन्हें काफी पैसों का नुकसान हो जा रहा है। पुलिस वाले 500 के पुराने नोट तो रिश्वत में ले लेते हैं, लेकिन वापस एक भी पैसा नहीं देते। उन्होंने बताया कि मालिकों द्वारा उन्हें पुराने नोट दिए जाते हैं, जो वह पेट्रोल पंप और पुलिस को देते हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस वाले धमकाते हैं कि या तो खुले पैसे दो या फिर 500 का पूरा नोट ले लेंगे।

ट्रक ट्रांसपोर्टर कहते हैं कि पहले ही शहर में ट्रक लाने से ग्रीन टैक्स की मार झेलनी पड़ रही थी और अब नोटबंदी ने मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं। 20 ट्रकों के मालिक ट्रांसपोर्टर धर्मेन्दर सिंह चौहान कहते हैं कि नोटबंदी तो जैसे ताबूत की आखिरी कील साबित हुई है।

वहीं एक ड्राइवर नन्हे सिंह हाथ में सिल्वर होलोग्राम वाला एक पेपर दिखाते हैं, जिसमें लाल रंग से एक नंबर लिखा हुआ था। उन्होंने कहा- ये 100 रुपए हैं। एमसीडी टोल सेन्टर पर इसे खुल्ले पैसे के तौर पर दिया जाता है, जब हम ग्रीन टैक्स के रूप में 1500 रुपए देते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि ड्राइवर तो इस तरह के खुल्ले पैसे के नाम पर दिए जा रहे कूपन को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जब वे ये कूपन टोल सेंटर को देंगे तो वो लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं।

वहीं साउथ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिवक्ता मुकेश यादव ने कहा मुझे इस तरह की प्रैक्टिस किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। करीब 200 ट्रांसपोर्टरों के साथ हुई एक मीटिंग में दिल्ली सरकार ने कहा था कि वह 31 दिसंबर तक दिल्ली में लगने वाले ग्रीन टैक्स से छूट दिए जाने की मांग को लेकर कोर्ट जाएंगे।

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