सरकार ने फेरा मुंह, तो पुलिस कर्मचारी ने उठाया जिम्मा, बचत के 3 लाख खर्च कर दुरुस्त कराई सड़क

मैसूर, जुलाई 10: हमारे आसपास के इलाकों में कई जगहों पर आपकों टूटी हुई सड़कें दिख जाएंगी। ये टूटी हुईं सड़कें आम आदमी के लिए कई मुश्किलें खड़ी करती रहती हैं और बारिश के सीजन में तो इन सड़कों पर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हम लोग स्थानीय प्रशासन, निगम या सरकारों को कोसते नजर आते हैं। और कोसें भी क्यों ना, सड़कें ठीक करवाना उनका ही काम है। लेकिन मैसूर के एक शख्स ने इससे हटकर कुछ काम कर दिया है। जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है। गड्ढों से भरी सड़क पर चलाने के लिए संघर्ष कर रहे यात्रियों की दुर्दशा से परेशान मैसूर के एक सहायक पुलिस उप-निरीक्षक ने इसे ठीक करने के लिए अपनी जेब से 3 लाख रुपये खर्च कर डाले।

एएसआई ने सड़क की मरम्मत करवाई

एएसआई ने सड़क की मरम्मत करवाई

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एचडी कोटे थाने में कार्यरत एएसआई एस दोरेस्वामी ने मादापुरा गांव से बेलातूर तक की सड़क की मरम्मत करवाई है। मदापुरा और के बेलत्तूर के बीच पांच किलोमीटर की सड़क एचडी कोटे तालुक के चिक्कदेवम्मा मंदिर को जोड़ती है। इसमें काफी गड्ढे थे, जिसके कारण खासतौर पर दोपहिया वाहनों से सफर करने वाले लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। (फोटो: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)

लोगों ने लगाई थी मदद की गुहार

लोगों ने लगाई थी मदद की गुहार

जब अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को बार-बार अनुरोध और ज्ञापन देने के बाद किसी ने इस सड़क की सुध ना ली, तो स्थानीय लोगों ने दोरेस्वामी से संपर्क किया। दोरेस्वामी उन लोगों की मदद के लिए तैयार हो गए। दरअसल दोरेस्वामी अपने इलाके में लोगों की मदद करने के लिए जाने हैं। उन्होंने अपनी पत्नी चंद्ररिका के साथ मिलकर रक्षणा सेवा ट्रस्ट के जरिए इस काम को करवाने की योजना बनाई।

तीस गांवों के लोगों की इस सड़क पर है आवाजाही

तीस गांवों के लोगों की इस सड़क पर है आवाजाही

मंगलवार को उन्होंने खुद मिलकर मजदूरों के साथ इस काम में हाथ बटाया। उन्होंने सड़क पर मौजूद गड्ढों को भरा। उन्होंने कहा, यहां कई हादसे हो चुके हैं लोगों को गभीर चोटें भी इस सड़क में मौजूद गड्ढों के कारण आ चुकी हैं। 30 गांवों के लोग इस सड़क से रोज आवाजाही करते हैं। कुछ एंबुलेंस ड्राइवर्स ने पहले इस दिक्कत को उठाया था। उन्होंने तालुक की एक और गड्ढों से भरी सड़क को ठीक कराने में मदद की थी। दोरेस्वामी ने दो नाबालिग लड़कियों को भी गोद लिया है, जिनके माता-पिता की मौत हो गई थी।

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