'रहता नहीं है तो क्या दे दोगे? ऐसे होती है देशसेवा?', दिग्विजय सिंह की कच्चातिवु टिप्पणी पर PM मोदी
Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में जुटे हैं। इसी कड़ी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राजस्थान के करौली में रैली को संबोधित किया। यहां पीएम ने तमिलनाडु के पास स्थित कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को देने पर कांग्रेस के फैसले पर जमकर निशाना साधा।
पीएम ने कच्चातिवु द्वीप पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 'क्या कच्चातिवु पर कोई रहता है' वाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। पीएम मोदी ने दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कहा कि रहता नहीं है तो क्या दे दोगे? ऐसे होती है देशसेवा? ये है इनकी मानसिकता। इनके लिए देश का खाली हिस्सा सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा है। जानिए आगे पीएम ने क्या कहा?

पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु के पास के एक द्वीप, कच्चातिवु, को श्रीलंका को दे दिया था। इस देश विरोधी कुकृत्य को कांग्रेस बेशर्मी से जायज ठहरा रही है। कल ही कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा है कि कच्चातिवु पर कोई रहता है क्या। रहता नहीं है तो क्या दे दोगे? ऐसे होती है देशसेवा? ये है इनकी मानसिकता। इनके लिए देश का खाली हिस्सा सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा है।
कच्चातिवु पर कांग्रेस ने क्या कहा?
चूंकि कच्चाथीवू एक चुनावी मुद्दा बन गया है, खासकर तमिलनाडु में, जहां बीजेपी बड़े पैमाने पर लाभ का लक्ष्य बना रही है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी के दावे निराधार थे और उन्होंने केवल एक एजेंडा बनाने की कोशिश की। कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी सरकार की पहले यह राय थी कि कच्चातिवु द्वीप अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के श्रीलंकाई हिस्से में पड़ता है और इसे न तो अधिग्रहित किया गया है और न ही सौंपा गया है।
चिदंबरम ने आगे कहा कि अगर वह (मोदी) कच्चातिवु के प्रति इतने भावुक थे, तो उन्होंने पिछले 9 सालों तक क्या किया? उन्होंने कितनी बार श्रीलंका का दौरा किया है? श्रीलंका के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति कितनी बार भारत आए हैं? श्री जयशंकर कितनी बार श्रीलंका गए हैं? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक ज्ञापन में, चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में एक सभा में पीएम के साथ कच्चातिवु का मुद्दा उठाया। पीएम ने जवाब क्यों नहीं दिया?
जयशंकर ने दिया कांग्रेस को जवाब
वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि डीएमके श्रीलंका को द्वीप देने में शामिल थी। जयशंकर ने कहा कि बातचीत बंद दरवाजे के पीछे हो रही थी, एक समझौता हुआ और तत्कालीन डीएमके मुख्यमंत्री इस पर सहमत हुए... लोगों को पता होना चाहिए कि ऐसी पार्टियां हैं जो संसद में कुछ कहती हैं और बंद दरवाजे के पीछे कुछ और तय करती हैं।












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