विपक्ष का हमला और पीएम मोदी को नोट बंदी पर चाहिए आपकी राय
विपक्ष के हमले के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की लोगों से उनकी एप के जरिए नोट बंदी पर अपनी राय देने की अपील।
नई दिल्ली। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट को बंद करने का ऐलान किया। इस ऐलान के साथ ही विपक्ष ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। विपक्ष को तगड़ा जवाब देने के लिए पीएम मोदी ने जनता से अपील की है कि नोट बंदी पर एप के जरिए उन्हें अपनी राय दे।

ट्वीट की पीएम मोदी ने की अपील
पीएम मोदी ने जनता से एक सर्वे में हिस्सा लेने की अपील की है। यहां पर 500 रुपए और 1,000 रुपए के नोटों को बंद करने को लेकर कई तरह के सवाल मौजूद हैं। पीएम मोदी ने लोगों से इन सवालों का जवाब देने के लिए कहा है।
पीएम मोदी ने इस बाबत एक ट्वीट किया और लिखा, 'मैं करेंसी नोट को लेकर किए गए फैसले पर आपका विचार सीधे तौर पर जानना चाहता हूं। आप एनएम एप पर मौजूद सर्वे में हिस्सा लीजिए।'
किस तरह के सवाल पीएम ने पूछे
पीएम मोदी ने इस सर्वे से जुड़े कुछ सवाल भी पोस्ट किए हैं। उन्होंने पूछा है अगर लोगों के पास पीएम नरेंद्र मोदी के लिए कोई सलाह या फिर कोई विचार है तो वे जरूर उनके साथ साझा करें।
कुछ और सवाल भी हैं जैसे क्या आपको लगता है कि देश में काला धन मौजूद है?
क्या लोग मानते हैं कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई की जरूरत है? सरकार के 500 रुपए और 1,000 रुपए के नोट बंद करने के फैसले पर आप क्या सोचते हैं?
विपक्ष ने बोला है सरकार पर हमला
पीएम मोदी का नोट बंदी के फैसले पर आम जनता की राय लेने का फैसला ऐसे समय आया है जब विपक्ष ने सदन में सरकार पर इस मुद्दे को लेकर हमला बोला हुआ है।
मंगलवार को पीएम ने बीजेपी की मीटिंग में इस फैसले को गरीब जनता से जुड़ा हुआ फैसला बताया।
हो चुका है सर्वे
वहीं पीएम मोदी के एप पर जनता की राय लेने के फैसले से कुछ दिनों पहले भी एक सर्वे हो चुका है। इस सर्वे में करीब भारी संख्या में लोगों ने पीएम के इस कदम को सराहा था।
नागरिकों से जुड़ी संस्था लोकलसर्किल्स की ओर से यह सर्वे हुआ था। इस सर्वे में देश के 200 शहरों के 9,000 लोगों को शामिल किया गया था।
सर्वे में 51 प्रतिशत लोगों ने इसे अच्छा फैसला बताया था। 24 प्रतिशत लोगों ने इसे बहुत ही खराब फैसला बताया था।
25 प्रतिशत ने इस कदम को एक औसत कदम करार दिया था। तीन प्रतिशत लोग ऐसे थे जो विमुद्रीकरण या नोट बंदी के खिलाफ थे।












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