PM Modi Tamil nadu Visit: इस वजह से PM मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए स्टालिन? सरकार से कर दी बड़ी मांग
PM Modi Tamil nadu Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तमिलनाडु के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने रामेश्वरम में 2.07 किलोमीटर लंबा पंबन ब्रिज (Pamban Bridge) राष्ट्र को समर्पित किया। यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज है। जिसको बनाने में लगभग 550 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे।
वहीं कार्यक्रम से सीएम एम.के. स्टालिन ने दूरी बना ली। वहीं उन्होंने पीएम मोदी से परिसीमन (Delimitation) को लेकर गारंटी देने की मांग कर ली।

स्टालिन ने क्या कहा?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर तमिलनाडु की जनता की चिंताओं को दूर करने का वादा मांगा है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि, तमिलनाडु की संसदीय सीटों की हिस्सेदारी में कोई बदलाव न हो।
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'स्पष्ट गारंटी देनी चाहिए...'
स्टालिन ने कहा, 'तमिल भूमि पर खड़े होकर प्रधानमंत्री को स्पष्ट गारंटी देनी चाहिए कि तमिलनाडु और अन्य राज्य, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। उन्हें आगामी परिसीमन में इसका नुकसान न झेलना पड़े। उनकी संसदीय सीटों की प्रतिशत हिस्सेदारी को बरकरार रखा जाएगा।'
संविधान संशोधन करने की मांग
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, 'आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह वादा सार्वजनिक रूप से करना चाहिए, तमिलनाडु की जनता के मन में मौजूद डर को दूर करना चाहिए, और इसके लिए संसद में संविधान संशोधन कराना चाहिए। यही एकमात्र तरीका है जिससे निष्पक्ष सीमा पुनर्निर्धारण संभव हो सकता है। मुझे पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस दिशा में कदम उठाएंगे।'
1971 की जनसंख्या के आधार पर हो परिसीमन
तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियां सीमांकन 1971 की जनसंख्या के आधार पर ही किए जाने की मांग कर रही हैं, और उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि, '2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिए गए आश्वासन को बरकरार रखा जाए।'
स्टालिन ने कहा कि, 'जैसे वाजपेयी ने उस समय यह वादा किया था, उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी को भी संसद में बयान देकर इस व्यवस्था को 2026 के बाद अगले 30 वर्षों के लिए बढ़ाने की घोषणा करनी चाहिए।'
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सीमांकन 2026 की जनगणना के आधार पर होता है, तो तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों को संसद में उचित प्रतिनिधित्व खोना पड़ सकता है।
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