PM मोदी ने किया ऐलान, 'दिल्ली में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का म्यूजियम बनेगा'
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर लिखी किताब, 'चंद्रशेखर- द बेस्ट आइकन ऑफ आईडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स' का विमोचन किया। विमोचन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा दिल्ली में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का एक म्यूजियम बनाने का उन्होंने फैसला कर लिया है। मैं पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवार को उनेक जीवन के विभिन्न पहलू बताने के लिए आमंत्रित करता हूं। चाहे वो कोई हों, आईके गुजरालजी हों, चरण सिंहजी, देवे गौड़ा या मनमोहन सिंहजी। पीएम मोदी ने कहा कि, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रेशखर को जितना गौरव मिलना चाहिए था उतना नहीं मिला। पीएम मोदी ने पूर्व पीएम चंद्रशेखर की छवि खराब करने की कोशिश की गई। यह किताब हरिवंश और रविदत्त बाजपेयी ने साथ मिलकर लिखी है।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं पहली बार 1977 में चंद्र शेखर जी से मिला था। मैं उनसे दिल्ली एयरपोर्ट पर मिला था, मैं भैरों सिंह शेखावत जी के साथ यात्रा कर रहा था। दोनों नेताओं ने अपनी अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद एक करीबी बंधन का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि, आज छोटा-मोटा कोई नेता भी 10-12 किमी की पदयात्रा करेगा, तो 24 घंटे खबरों में बना रहेगा। पीएम मोदी ने कहा, 'चंद्रेशखर जी ने चुनाव के दौरान नहीं, बल्कि उन्होंने गांव, गरीब, किसान को ध्यान में रखकर पदयात्रा की। लेकिन देश ने उन्हें जो गौरव देना चाहिए था, वो नहीं दिया।
अटल बिहारी वाजपेयी के समय को याद करते हुए कहा कि, चंद्रशेखर जी अटल जी को हमेशा गुरु जी कहकर बुलाते थे और सदन में भी अगर बोलते थे तो पहले अटल जी से कहते थे कि गुरु जी मुझे माफ़ करिये, मैं आज जरा आपकी आलोचना करूंगा। पीएम मोदी ने कहा कि, जिस समय कांग्रेस का सितारा चमकता हो, उस समय वो कौन सी प्रेरणा होगी कि एक व्यक्ति ने कांग्रेस से बगावत का रास्ता चुन लिया। शायद ये बलिया के संस्कार होंगे। शायद बलिया की मिट्टी में आज भी वो सुगंध होगी।
उन्होंने कहा कि, चंद्रशेखर जी के विचारों को लेकर किसी को भी एतराज हो सकता है। लेकिन जान बूझकर और सोची समझी रणनीति के तहत चंद्रशेखर जी की यात्रा को डोनेशन, करप्शन, पूंजीपतियों के पैसे, इस सभी के इर्द-गिर्द रखा। ये सब हमें अखरता है। पीएम मोदी ने कहा कि, आप सबके आशीर्वाद से मैंने ठान ली है कि दिल्ली में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की स्मृति में एक बहुत बड़ा आधुनिक संग्राहलय बनाया जाएगा। इस किताब का विमोचन के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी मौजूद थे। साथ ही लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद भी किताब के विमोचन के दौरान मौजूद थे।












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