अंतिम वक्त में बदल जाता है PM मोदी का रास्ता, डमी काफिले का होत है इस्तेमाल
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से आतंकवादियों के निशाने पर हैं। इसी खतरे की वजह से मोदी की सुरक्षा चाक-चौबंद्ध होती है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कुछ नए कदम उठाए गए हैं। अब जब भी वह सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले होते हैं, तो उससे पहले दो रास्ते तय किए जाते हैं और उनके काफिले के अलावा एक डमी काफिला भी साथ चलता है। पहले ऐसा सिर्फ आपात स्थिति में ही किया जाता था। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी के साथ हमेशा नकली काफिला चलता है और पीएम के रुट का फैसला हमेशा आखिरी वक्त में होता है।
प्रधानमंत्री की यात्रा के इंतजाम से जुड़े एक सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकवादियों के निशाने पर हैं। इसलिए जब भी वह सड़क से यात्रा करने वाले होते हैं, उससे पहले दो रास्ते तय किए जाते हैं और उनके काफिले के साथ एक नकली काफिला भी होता है। दोनों ही रास्तों पर ट्रैफिक रोक दिया जाता है। आखिरी वक्त पर फैसला किया जाता है कि प्रधानमंत्री का काफिला किस रास्ते से गुजरेगा।

डमी काफिले के साथ चलते हैं मोदी
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक मोदी को लश्कर ए तैयबा और जैश ए मुहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों से खतरा है। इसके अलावा, इंडियन मुजाहिदीन और सिमी भी उन्हें निशाना बनाने की फिराक में हैं। ऐसे में जब भी वह सड़क मार्ग से गुजरते है तो उनके लिए अलग प्लान तैयार किया गया है।

आतंकियों के निशाने पर मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा का जिम्मा स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप के पास है। उनकी थ्री लेयर सुक्षा उनकी रक्षा करती है।

दो काफिले के साथ चलते हैं मोदी
मोदी की सुरक्षा में लगे अधिकारियों के मुताबिक जब भी वह सड़क मार्ग से गुजरने वाले होते हैं तो आतंकवादी संगठनों की इस पर नजर होती है। इसलिए उनकी सुरक्षा की खातिर कई नए कदम उठाए गए हैं।

सुरक्षा का नया प्लान
अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी के साथ हमेशा नकली काफिला चलता है और पीएम के रुट का फैसला हमेशा आखिरी वक्त में होता है।

बढ़ा मोदी पर खतरा
पीएम की सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए आतंकवादी संगठनों के बीच हाल में ही कई बैठकें हुई हैं। इनमें से एक नेपाल में आईएम और सिमी के बीच और दूसरी पाकिस्तान में लश्कर के आतंकवादियों के बीच हुई थी। इन बैठकों में मोदी का जिक्र किया गया था।












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