अफगानिस्तान पर PM मोदी की अहम बैठक, राजनाथ और अजित डोभाल भी हुए शामिल
नई दिल्ली, सितंबर 06: अफगानिस्तान में तेजी से बदलती स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात कर रहे हैं। तालिबान का देश पर पूर्ण नियंत्रण और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख की काबुल में उपस्थिति के दावों के बीच शीर्ष नेतृत्व की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद हैं।

अफगानिस्तान में विकसित हो रहे हालात को देखते हुए पीएम मोदी ने भारत की तात्कालिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समूह का गठन किया है। सूत्रों ने कहा कि समूह में विदेश मंत्री एस जयशंकर, श्री डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समूह अफगानिस्तान में जमीनी स्थिति और उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं की निगरानी कर रहा है।
आज की चर्चा तालिबान के साथ जुड़ाव पर भी केंद्रित होने की उम्मीद है। तालिबान द्वारा काबुल पर नियंत्रण करने के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद भी सरकार के गठन पर कोई स्पष्टता नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि भारत टॉप रेजिस्टेंस फोर्स को करीब से देख रहा है, जो तजाकिस्तान में हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते, कतर में भारत के दूत दीपक मित्तल ने दोहा में एक शीर्ष तालिबान नेता के साथ बातचीत की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली का तत्काल ध्यान यह सुनिश्चित करना है कि अफगान धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाए और निकासी और चर्चा उसी तर्ज पर हो। इससे पहले आज, तालिबान ने दावा किया कि पंजशीर घाटी में एक महत्वपूर्ण लड़ाई के बाद अफगानिस्तान पर उसका पूरा नियंत्रण है। हालांकि, पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के नेतृत्व में अफगान नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस दावे का खंडन कर दिया है।
इसी बीच सूत्रों ने दावा किया है कि, आईएसआई प्रमुख तालिबान गुटों और हक्कानी नेटवर्क के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए काबुल में पहुंच गया है। बता दें कि कई दिनों बाद भी अफगानिस्तान में तालिबान अपनी सरकार का गठन नहीं कर सका है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि तालिबान समावेशी सरकार चाहता है, लेकिन अब तीन सप्ताह हो गए हैं। लेकिन उनके विभिन्न गुटों के भीतर उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के चलते सरकार गठन में देरी हो रही है।












Click it and Unblock the Notifications