धर्म चक्रवर्ती कौन होता है? PM मोदी को जैन समाज ने क्यों दिया ये टाइटल, क्या है इस सम्मान के पीछे की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 'धर्म चक्रवर्ती' (Dharma Chakravarti) की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम प्रख्यात जैन मुनि आचार्य विद्यानंद महाराज (Vidyanand Maharaj) की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय श्रद्धांजलि अभियान के उद्घाटन के साथ हुई। इस अभियान के तहत देशभर में सांस्कृतिक प्रदर्शनी, शैक्षिक अभियान, विद्वत गोष्ठियां और अंतरधार्मिक संवाद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे जैन दर्शन और भारत की आध्यात्मिक विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी।

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कौन हैं आचार्य विद्यानंद महाराज?
आचार्य विद्यानंद महाराज जैन धर्म के उन विचारशील मुनियों में से एक थे जिन्होंने प्राकृत भाषा, जैन दर्शन और भारतीय तात्त्विक चिंतन पर 50 से अधिक ग्रंथों की रचना की।

उनके नेतृत्व में कई प्राचीन जैन मंदिरों का पुनरुद्धार हुआ और पारंपरिक शिक्षा को प्रोत्साहन मिला। उन्होंने अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण जैसे मूल्यों को केवल प्रवचन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक सुधार और वैचारिक जागरण का माध्यम बनाया।

क्या होती है 'धर्म चक्रवर्ती' की उपाधि?
'धर्म चक्रवर्ती' उपाधि का अर्थ है- धर्म के चक्र को चलाने वाला महान मार्गदर्शक। यह उपाधि जैन परंपरा में उस व्यक्ति को दी जाती है जो अहिंसा, सत्य और नैतिक मूल्यों का वैश्विक प्रचार-प्रसार करता है।

प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत की आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक मंचों पर पहुंचाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैन मूल्यों की प्रतिष्ठा बढ़ाने और एक समावेशी, नैतिक समाज निर्माण की दिशा में योगदान के लिए दिया गया।

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