प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: महिला आरक्षण विधेयक की हार पर विपक्ष को करारा जवाब
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक की हार के बाद विपक्ष की कड़ी निंदा की है। शनिवार को शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन विपक्ष के रुख का एक मजबूत जवाब था। उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों से इनकार का जश्न मनाने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया।

एक्स पर एक पोस्ट में शिंदे ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम की अस्वीकृति केवल एक विधायी हार नहीं थी, बल्कि महिलाओं की गरिमा का अपमान था। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह झटका अस्थायी होगा। शिंदे ने मोदी के नेतृत्व में अपने विश्वास को दोहराया, यह दावा करते हुए कि उनके मार्गदर्शन में महिलाओं को अंततः उनके अधिकार और सम्मान मिलेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम राष्ट्र को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण विधेयक में बाधा डालने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने सरकार के प्रयासों के बावजूद विधेयक के पारित होने में बाधा डालकर महिलाओं की आकांक्षाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। मोदी ने विशेष रूप से कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और एसपी जैसे दलों का नाम लिया, और उन पर अपनी स्वार्थी राजनीति से प्रगति में बाधा डालने का आरोप लगाया।
इस विधेयक का उद्देश्य विधानमंडलों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना था। मोदी का संबोधन लोकसभा में इसकी हार के एक दिन बाद आया, जो राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालता है।
शिवसेना का समर्थन
शिंदे ने इस प्रयास में एनडीए सरकार के प्रति शिवसेना के अटूट समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने जोर दिया कि शिवसेना सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और महिलाओं के अधिकारों को मान्यता और सम्मान मिले, यह सुनिश्चित करने के प्रयासों का नेतृत्व करेगी।
महिलाओं के आरक्षण पर जारी बहस भारत में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। हालिया घटनाओं ने लैंगिक समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा को बढ़ावा दिया है, जिसमें विभिन्न हितधारक विधेयक की हार के निहितार्थों पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।
With inputs from PTI












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