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2024 से पहले बढ़ सकती है पीएम किसान निधि की रकम, जानें मोदी सरकार और किनके लिए खोल सकती है खजाना?

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्षी दलों ने कई सारे लोक-लुभावन वादों का पिटारा खोला है। बीजेपी ने भी अपनी ओर से वोटरों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का अंतिम फोकस 2024 में होने वाला लोकसभा चुनाव है, जिसके लिए उसकी तरकश में कई तीर हैं, जिसे वह अपने हिसाब से कभी भी चला सकती है।

2024 के लिए केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार जिन कल्याणकारी कदमों पर खास फोकस कर सकती है, उनमें छोटे और मंझोले किसानों के लिए खास सहायता और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के हितों वाले फैसले हो सकते हैं।

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पुरानी पेंशन है विपक्ष का बड़ा एजेंडा
गौतलब है कि विपक्षी पार्टियां खासकर कांग्रेस लगातार कुछ विधानसभा चुनावों से पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और कृषि लोन को मुद्दा बना रही हैं। कई कांग्रेस शासित राज्यों ने हाल में पुरानी पेंशन स्कीम की ओर लौटने का फैसला भी किया है। इसी महीने 1 अक्टूबर को जब दिल्ली के रामलीला मैदान में ओपीएस की वापसी की मांग को लेकर देश भर से केंद्र और राज्य सरकार के हजारों कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था, तो विपक्षी दल उनके समर्थन में खड़े थे।

एनपीएस में संशोधन पर केंद्र कर सकता है विचार
जब कुछ राज्यों की विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का मुद्दा भुनाया और उसे सफलता मिलती दिखी तो इसी साल मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की पेंशन स्कीम की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की। इस समिति से मौजूदा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अगर जरूरत है तो बदलाव के लिए सुझाव देने को कहा गया था।

अब जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार एनपीएस के कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसके अनुसार इसमें सरकारी कर्मचारियों के लिए कुछ बेहद आकर्षक विकल्प के भी सुझाव शामिल हैं, जैसे कि अंतिम सैलरी का एक निश्चित हिस्सा बतौर पेंशन सुनिश्चित किया जाना। गौरतलब है कि पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की मांग इसलिए हो रही है कि उसमें अंतिम वेतन की आधी रकम बतौर पेंशन मिलने की गारंटी होती है।

किसानों के लिए कुछ बड़ा सोच सकती है मोदी सरकार
विपक्षी दलों की ओर से किसानों को रिझाने के लिए आजमाया हुआ चुनावी फंडा उनकी ऋण माफी को फिर से हथियार बनाया जा रहा है। इसलिए भाजपा सरकार किसानों के लिए भी कुछ बड़ा करने की सोच सकती है। अभी देश भर के छोटे और मंझोले किसानों को केंद्र की ओर से हर साल तीन किश्तों में 6,000 रुपए सीधे खाते में डाले जा रहे हैं। मोदी सरकार ने इस पीएम किसान सम्मान निधि की शुरुआत 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले यानी फरवरी में की थी।

पीएम किसान सम्मान निधि की रकम बढ़ाई जा सकती है
अब जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक केंद्र सरकार के सामने इसको लेकर कई तरह के सुझाव और विकल्प पहुंच रहे हैं। इसमें 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले किसानों के लाभ वाले कुछ और कदम उठाए जाने के सुझाव शामिल हैं। इसमें से पीएम किसान निधि के तहत हर चार महीने में मिलने वाली 2000 रुपए की किश्त में बढ़ोतरी का भी सुझाव शामिल है।

एक आंकड़े के मुताबिक देश में पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की संख्या 14 करोड़ से ज्यादा है। 2019 के आम चुनावों में मोदी सरकार की बड़ी जीत के जो कई किरदार माने जाते हैं, उसमें इस योजना की भूमिका भी काफी अहम मानी जाती है।

अगले लोकसभा चुनावों के लिए मोदी सरकार के विचारों के केंद्र में एक बार फिर से किसान और सरकारी कर्मचारी हो सकते हैं, इसका संकेत एक दिन पहले ही इसके दो बड़े फैसलों से मिलता है। जैसे सरकार ने रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य काफी बढ़ा दिया है, जिसमें गेहूं की एमएसपी में अबतक का रिकॉर्ड इजाफा किया गया है। वहीं सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों का डीए भी 4% बढ़ाने का एलान किया गया है।

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