Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

'दुकानदारी ही करनी है', स्टार्टअप पर ऐसा क्या बोल गए मंत्री पीयूष गोयल, कि CEO से लेकर आम लोग तक भड़क गए

"क्या हमें आइसक्रीम या चिप्स बनाना है? दुकानदारी ही करना है? हम फूड डिलीवरी ऐप बना रहे हैं, सस्ते मजदूर चाहते हैं ताकि अमीर लोग घर से बाहर निकले बिना खाना खा सकें...दूसरी तरफ चीन स्टार्टअप ईवी, बैटरी तकनीक, सेमीकंडक्टर और एआई पर काम कर रहा है।'' ये बातें नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 'स्टार्टअप महाकुंभ' में कही हैं।

पीयूष गोयल के इस बयान को लेकस सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। बड़ी कंपनियों के सीईओ, फाउंडर से लेकर आम लोग भी पीयूष गोयल की इन बातों की आलोचना कर रहे हैं। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तीखी आलोचना करने को लेकर पीयूष गोयल अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर पीयूष गोयल का पूरा बयान क्या था और सोशल मीडिया पर लोग उनको लेकर क्या-क्या कह रहे हैं?

Union Minister Piyush Goyal

भारत के स्टार्टअप को लेकर क्या बोले पीयूष गोयल?

स्टार्टअप महाकुंभ में 03 अप्रैल 2025 को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश में कई स्टार्टअप फूड डिलीवरी और बेटिंग और फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि चीन में स्टार्टअप ईवी, बैटरी तकनीक, सेमीकंडक्टर और एआई पर काम कर रहे हैं।

पीयूष गोय ने सवाल किया कि

''क्या देश तकनीकी प्रगति के लिए कोशिश करने के बजाय कम वेतन वाली गिग नौकरियों से हम और आप संतुष्ट है। क्या हमें आइसक्रीम या चिप्स बनाना है? दुकानदारी ही करना है। क्या हम सिर्फ डिलीवरी बॉय और डिलीवरी गर्ल बनाने में खुश हैं? अमन गुप्ता...जरा सार्क टैंक में अपने विचार बदलो। क्या आप इसे स्टार्टअप कहते हैं...ये तो बिजनेस है और पैसा कमाने का बस एक तरीका है।''

पीयूष गोयल ने कहा, ''भारतीय स्टार्टअप सिर्फ फूड डिलीवरी और हाइपरफास्ट लॉजिस्टिक्स तक ही सीमित हैं। भारतीय स्टार्टअप फूड डिलीवरी ऐप, फैंसी आइसक्रीम, कुकीज, इंस्टेंट ग्रॉसरी डिलीवरी, बेटिंग और फैंटेसी स्पोर्ट ऐप और रील्स और इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी बनाने में बिजी हैं। दूसरी ओर चीन में स्टार्टअप "ईवी और बैटरी तकनीक, सेमीकंडक्टर और एआई, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन, ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और डीप टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर" पर काम कर रहे हैं।''

पीयूष गोयल ने सवाल किया,

''क्या ये वाकई इनोवेशन है, या सिर्फ सुविधा के नाम पर सस्ती मजदूरी का इस्तेमाल है...। आज के भारत के स्टार्टअप क्या हैं? हमारा पूरा फोकस सिर्फ फूड डिलीवरी ऐप्स पर है, जहां बेरोजगार युवाओं को सस्ते मजदूर बना दिया गया है ताकि अमीर लोग अपने घर में बैठकर खाना खाएं। मुझे उनसे कोई दिक्कत भी नहीं है...बिल्कुल ठीक है...आप करो...लेकिन हमें 'दुनिया में सर्वश्रेष्ठ' बनना है...क्या हम ये करके दुनिया में सबसे बेहतरीन बन पाएंगे। नहीं..।''

देशों की तुलना करने वाली एक स्लाइड दिखाते हुए पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को विदेशी संस्थाओं द्वारा हिस्सेदारी खरीदने के बजाय अधिक घरेलू पूंजी की जरूरत है। इसके लिए, यूनिकॉर्न और उद्योग एक फंड बना सकते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे दुख होता है जब मुझे पता चलता है कि 25 लाख रुपये या 50 लाख रुपये में एक युवा स्टार्टअप ने शानदार विचार किसी विदेशी कंपनी को बेच दिया गया। आइए कोशिश करें और इस इकोसिस्टम में कुछ और घरेलू पूंजी लाएं।"

पीयूष गोयल के बयान ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर बहस छेड़ दी

सोशल मीडिया पर जैसे ही भारत के स्टार्टअप को लेकर पीयूष गोयल का ये बयान सामने आया, लोगों में इसको लेकर बहस छिड़ गई। आम जनता तो छोड़िए, कई कंपनी की सीईओ ने पीयूष गोयल के इस बयान की आलोचना की है। ज्यादातर लोगों का कहना है कि पीयूष गोयल का ये बयान देश का युवाओं का मनोबल तोड़ने वाला है। जेप्टो (Zepto) के को-फाउंडर और सीईओ आदित पलिचा ने पीयूष गोयल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने स्टार्टअप की उपलब्धियां गिनाईं।

आदित पलिचा ने एक्स पर लिखा,

''भारत में स्टार्टअप की आलोचना करना आसान है, खासकर जब आप उनकी तुलना अमेरिका/चीन में बन रही टेक्नोलॉजी से कहते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि जो कंपनी 3.5 साल पहले अस्तित्व में नहीं थी, आज जेप्टो लगभग 1.5 लाख लोगों को रोजगार दे रही है। सरकार को प्रति वर्ष ₹1,000+ करोड़ का टैक्स दे रही है, देश में एक बिलियन डॉलर से अधिक का FDI लाया गया और भारत की बैकएंड को व्यवस्थित करने में सैकड़ों करोड़ का निवेश किया गया है। अगर यह भारत के स्टार्टअप में चमत्कार नहीं है, तो मैं ईमानदारी से नहीं जानता कि इसे क्या कहते हैं।''

Zepto के CEO ने पूछा- भारत के AI में पिछड़ने की असली वजह क्या है?

आदित पलिचा ने अपने पोस्ट में लिखा,

''भारत के पास अपना खुद का बड़े पैमाने का आधारभूत AI मॉडल क्यों नहीं है? भारत के AI में पिछड़ने की असली वजह क्या है? ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने अभी भी वैश्विक स्तर की इंटरनेट कंपनियां खड़ी नहीं कीं। जैसे ऐमजॉन, गूगल और अलीबाबा ने पहले कंज्यूमर इंटरनेट से शुरुआत की और बाद में एआई पर काम किया। वैसी कोशिश भारत में भी होनी चाहिए। क्लाउड कंप्यूटिंग को किसने आगे बढ़ाया? अगर हम कभी भी महान तकनीकी क्रांतियों का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो हमें इंटरनेट में बेहतरीन स्थानीय चैंपियन बनाने की जरूरत है। स्टार्टअप इकोसिस्टम, सरकार और भारतीय पूंजी के बड़े पूल के मालिकों को इन स्थानीय चैंपियनों के निर्माण का सक्रिय रूप से समर्थन करने की जरूरत है, न कि उन टीमों को नीचे खींचने की जो वहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।''

अशनीर ग्रोवर बोले- भारत में नेताओं को 'रियलिटी चेक' की जरूरत है

भारतपे के को-फाउंडर अशीनर ग्रोवर ने एक्स पोस्ट में लिखा,

''भारत में सिर्फ नेताओं को 'रियलिटी चेक' की जरूरत है। बाकी हर कोई भारत की 'रियलिटी' में ही रह रहा है। चीन में भी पहले फूड डिलीवरी से ही शुरुआत की थी और फिर डीप टेक में विकसित हुआ। उन्होंने जो किया है, उसकी आकांक्षा करना बहुत अच्छा है। शायद नेताओं को आज जॉब क्रिएटर्स को फटकारने से पहले 20 साल तक 10% से ज्यादा की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने का लक्ष्य तय करना चाहिए। इस बहस को शुरू करने के लिए मंत्री महोदय का धन्यवाद।''

पूर्व इनफोसिस एग्जीक्यूटिव और वेंचर कैपिटलिस्ट मोहनदास पई ने भी केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। पई ने लिखा, ''सरकार स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने की जगह उन पर एंजल टैक्स और अन्य नीतियों से दबाव बना रही है।''

देखें सोशल मीडिया पर अन्य लोगों ने क्या कहा?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+