कोरोना के इलाज में प्रयोग हो रही दो दवाओं का मामला पहुंचा SC, उत्पादकों के खिलाफ CBI जांच की मांग

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की दवा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है। जिसमें याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कोर्ट को सीबीआई को निर्देश देना चाहिए कि वो रेमडेसिविर और फैविपिराविर का उत्पादन और बिक्री करने वाली 10 कंपनियों पर एफआईआर दर्ज करे। साथ ही उनके खिलाफ विस्तार से जांच करे, क्योंकि दोनों ही कंपनियों के पास भारत में उत्पादन और बिक्री का लाइसेंस नहीं है।

cbi

जनहित याचिका डालने वाले वकील एम एल शर्मा के मुताबिक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से लाइसेंस लिए बिना 10 कंपनियां कोरोना के इलाज के लिए दोनों दवाओं का उत्पादन कर रही हैं। साथ ही उनकी बिक्री भी की जा रही है। याचिकाकर्ता के मुताबिक भारतीय दवा कंपनियों ने सिर्फ विदेशी कंपनियों गिलीड साइंस इंक और फ्यूजीफिल्म के साथ रेमडेसिविर और फैविपिराविर के उत्पादन का करार किया है। ऐसे में अगर इसे भारत में बेचना है, तो उसका वैध लाइसेंस इन कंपनियों के पास होना चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिन अस्पतालों में इन दोनों दवाओं की आपूर्ति की गई है, वहां 300 से अधिक डॉक्टरों की मौत हो गई है।

आपको बता दें कि रेमडेसिविर और फैविपिराविर कोरोना वायरस का पुख्ता इलाज तो नहीं करती लेकिन कई बार गंभीर मरीजों पर दोनों दवाओं ने अच्छा रिजल्ट दिया है। अब याचिकाकर्ता की मांग है कि भारत में इन दोनों दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों के खिलाफ ड्रग कानून, 1940 के तहत आपराधिक और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही ये जांच सीबीआई से करवाई जाए।

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