यूपी, राजस्थान और गुजरात के लोग पहले सतर्क हो जाएं, गर्मी को लेकर आई भयावह रिपोर्ट, जानिए क्या होगा ?

नई दिल्ली, 6 सितंबर: दुनिया के दो प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने भारत में गर्मी को लेकर एक रिसर्च किया है, जो काफी डरावनी है। यूं तो इस रिपोर्ट के हिसाब से पूरे भारत पर संकट मंडरा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के लोगों के लिए बिना देर किए तत्काल जाग जाने का समय है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों राज्यों में तापमान 51 डिग्री से ऊपर जाना आम बात हो जाएगी। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब देश के कई हिस्सों ने इस साल भयानक गर्मी झेली है और अभी भी जो राज्य भारी बारिश के लिए जाने जाते थे, वह सूखाग्रस्त हो चुके हैं। जानिए क्या है पूरी रिपोर्ट।

गर्मी को लेकर आई भयावह रिपोर्ट

गर्मी को लेकर आई भयावह रिपोर्ट

एक नए शोध से पता चला है कि भारत में अत्यधिक गर्मी सामान्य सी बात होने जा रही है और सबसे पहले इसकी चपेट में आकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भयावह तबाही मच सकती है। डाउन टू अर्थ ने एक रिसर्च के हवाले से यह रिपोर्ट दी है, जो कम्युनिकेशन अर्थ एंड एवायरमेंट में छापा गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व औद्योगिक स्तर के 2 डिग्री ऊपर भी सीमित कर दिया जाए, फिर भी भारत के इन हिस्सों को सूरज के इस भयानक प्रकोप से कोई नहीं बचा सकता।

यूपी, राजस्थान और गुजरात के लोग पहले सतर्क हो जाएं

यूपी, राजस्थान और गुजरात के लोग पहले सतर्क हो जाएं

फिलहाल तो इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात पर ही फोकस किया गया है, लेकिन सावधान होने का वक्त पूरे भारत के लिए है। क्योंकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे बुरी स्थिति में, मान लिया जाए कि दुनिया ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में असफल रहती है, तो इन तीन राज्यों में अत्यधिक गर्म दिन जैसे हालात हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं। अत्यधिक गर्म दिनों की स्थिति तब पैदा होती है, जब हीट इंडेक्स (हवा का तापमान और नमी का एक माप) 51 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। ऐसे समय में एक्सपर्ट घरों से बाहर कदम रखने के खिलाफ चेतावनी देते हैं। ऐसी स्थिति में सड़कें पिघल सकती हैं, पानी के स्रोत सूख सकते हैं, बर्फ पिघलने से अलग तबाही मच सकती है, दूसरे शब्दों में कहें तो यह 'प्रलय' की आहट लग सकती है।

खतरनाक गर्मी वाला दिन किसे कहते हैं?

खतरनाक गर्मी वाला दिन किसे कहते हैं?

वैसे नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक खतरनाक गर्मी वाले दिन के हालात तभी बनने शुरू हो जाते हैं, जब हीट इंडेक्स 39.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यह अमेरिका का मौसम, हाइड्रोलोजिक और पर्यावरण की भविष्यवाणी और उस संबंध में आवश्यक चेतावनी जारी करने वाला एक संगठन है। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक हीट इंडेक्स से मानव के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को आंका जाता है। हीट स्ट्रेस का पता लगाने के लिए यह सबसे बेसिक इंडिकेटर है।

पूरे भारत पर संकट की आहट

पूरे भारत पर संकट की आहट

यह सही है कि पहली चेतावनी यूपी, राजस्थान और गुजरात के लिए जारी की गई है। लेकिन, इसका कतई मतलब नहीं है कि मानवीय गलतियों का परिणाम भुगतने से बाकी भारत के लोग बचे रह जाएंगे। शोध में चेताया गया कि भारत के कई हिस्सों में 2050 तक प्रत्येक साल 100 बेहद खतरनाक गर्म दिनों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, वर्ष 2100 तक ऐसी घटनाएं पूरे देश में होने लग सकती हैं।

किस आधार पर हुआ शोध ?

किस आधार पर हुआ शोध ?

हार्वर्ड के एक शोधकर्ता और इस स्टडी के लीड ऑथर लुकस वार्गस जेप्पेटेल्लो का कहना है कि गर्मी के इन प्रभावों का भारत हॉटस्पॉट है। उन्होंने कहा, 'इस वर्ष मार्च-अप्रैल में गर्मी की लहर इन सीमाओं के करीब थी।' जेप्पेटेल्लो और उनके सहयोगियों ने 2050 और 2100 के लिए सांख्यिकीय पद्धतियों के आधार पर भविष्यवाणी की है। इसके लिए उन्होंने ऐतिहासिक डेटा, जनसंख्या अनुमान, आर्थिक विकास और कार्बन तीव्रता के आधार पर भविष्य में कार्बन डाइऑक्साइड स्तर का अनुमान जुटाया है।

उत्तर और पूर्वी भारत के लिए क्या है अनुमान ?

उत्तर और पूर्वी भारत के लिए क्या है अनुमान ?

इसी आधार पर किए गए शोध के मुताबिक 2050 तक उत्तर भारत और पूर्वी तट के अधिकांश हिस्सों में 100-150 दिन खतरनाक स्तर के गर्म दिनों का सामना करना पड़ सकता है। यह अनुमान तब है, जब हालात सबसे बेहतर रहेंगे। लेकिन, अगर हालात सबसे खराब रहे तो गुजरात, यूपी और राजस्थान में खतरनाक गर्म दिनों की संख्या 150 दिनों से भी अधिक हो जा सकती है। लेकिन, 2100 तक तो बहुत ही ज्यादा खतरनाक दिन पूरे देश को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

दुनिया के दूसरे देशों के लिए क्या है चेतावनी ?

दुनिया के दूसरे देशों के लिए क्या है चेतावनी ?

नए शोध में यह भी भविष्यवाणी की गई है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर सीमित भी रखा गया तो भी 2100 तक उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में खतरनाक दिनों की संख्या दुगुनी तक हो सकती है; और ऐसी स्थिति साल में आधे दिनों तक बनी रह सकती है। इसी परिदृश्य में, 2100 तक अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, चीन और जापान में खतरनाक गर्म दिनों की संख्या 3 से 10 गुना तक बढ़ सकती है। गौरतलब है कि कम से कम पिछले दो वर्षों से अमेरिका के पश्चिमी इलाके और कनाडा अत्यधिक गर्मी झेलने को मजबूर हुए हैं। इस साल तो यूरोप में भयंकर सूखे की स्थिति पैदा हुई है और चीन को भी भयानक गर्मी वाले दिनों का सामना करना पड़ रहा है।

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