महबूबा मुफ्ती सरकार के खिलाफ पीडीपी के ही वरिष्ठ नेता ने खोला मोर्चा

श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अशांति की आंच अब जम्मू कश्मीर में सत्ताधारी दल पीडीपी के अंदर भी पहुंच गई है। महबूबा मुफ्ती सरकार के खिलाफ पीडीपी के वरिष्ठ नेता और बारामूला से सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने मोर्चा खोल दिया है।

उन्होंने पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अपने शासन के एजेंडे को चलाने में यह सरकार विफल रही है। अगर सरकार जनता से किए वादे पूरे नहीं कर सकती तो इसे इस्तीफा दे देना चाहिए।

muzaffar hussain baig

मीडिया को इंटरव्यू देकर बेग ने छेड़े विरोध के सुर

पीडीपी नेता और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने न्यूज चैनलों और अखबारों को इंटरव्यू देकर जम्मू कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद किया है।

उनका कहना है कि पीडीपी के कार्यकर्ता इस बात से असंतुष्ट हैं कि यह सरकार जमीनी स्तर पर शासन चलाने और काम करके दिखाने में असफल रही है। आगे आने वाले समय में आशा है कि सरकार जनता के लिए कुछ करेगी।

उन्होंने कहा कि अगर फिर भी भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार सही से शासन चलाने में नाकाम रहती है तो इस्तीफा दे देना चाहिए।

पीडीपी-भाजपा सरकार क्यों है नाकाम?

मुजफ्फर हुसैन बेग का कहना है कि जम्मू कश्मीर की सरकार शासन चलाने में इसलिए फेल हो रही है क्योंकि महबूबा मुफ्ती खुद ही सरकार चलाने की प्रक्रिया सीख ही रहीं हैं क्योंकि उनको पहले से कोई विशेष अनुभव नहीं है। इस सरकार में एक वरिष्ठ नेता को छोड़कर बाकी सब नए हैं और उधर भाजपा दूसरे राज्यों में चुनाव को लेकर व्यस्त है।

कश्मीर की स्थिति का फायदा उठाने में लगी हैं पार्टियां

बेग का कहना है कि देश में पीडीपी की प्रतिद्वद्वी पार्टियां और देश से बाहर के दुश्मन, दोनों कश्मीर की स्थिति का फायदा लेने में जुटे हैं। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर आने पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ उनको राजनीतिक लाभ हुआ। लेकिन जब अलगाववादियों ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मिलने से इंकार कर दिया तो वहां भी कश्मीर की जनता ने ठगा सा महसूस किया क्योंकि वे घाटी में शांति और अपने बच्चों को स्कूल में देखना चाहते हैं।

महबूबा मुफ्ती पर सीधे हमला नहीं बोला

पीडीपी नेता मुजफ्फर हुसैन बेग जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर सीधे हमला करने से बचे। उन्होंने उनके प्रति हमदर्दी जताते हुए कहा कि उनकी सरकार में कोई ऐसा वरिष्ठ नेता नहीं है जो उनको सलाह दे। वो आतंकवादियों से, प्रोपैगेंडा से, हुर्रियत से, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला कर रही हैं और खुद अपनी ही पार्टी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना कर रही हैं।

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