Parliament Debate: 'संशोधन मतलब कानून में समस्या नहीं', संसद में किस नेता ने आज क्या कहा?

Parliamanet Debate On Farm Laws: नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल संसद से पारित कानूनों के खिलाफ देश भर में किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दो महीने से अधिक समय पर दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर किसान बैठे हुए हैं। इस बीच बहस के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र पर हमला बोलते हुए किसानों का समर्थन किया है और सरकार से कृषि कानून वापस लेने की किसानों की मांग मानने को कहा है। विपक्ष जहां किसानों की मांग का समर्थन कर रहा है वहीं अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के इस मामले में बोलने पर सरकार की आपत्तियों का भी विरोध कर रहा है। आइए देखते हैं कि बहस के दौरान किस नेता ने क्या कहा है।

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    Narendra Singh Tomar

    संशोधन का मतलब कानून में समस्या नहीं
    कृषि कानूनों के समर्थन में बोलते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा "मैंने यह स्पष्ट किया है कि सरकार संशोधन करने के लिए तैयार है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कृषि कानूनों में कोई समस्या है। राज्य विशेष के लोगों को इस बार में गलत जानकारी दी गई है।"

    उन्होंने आगे कहा कि "हमने उत्पादन लागत से 50% अधिक एमएसपी प्रदान करना शुरू कर दिया है। साथ ही 1 लाख करोड़ रुपये का कृषि बुनियादी ढांचा कोष आत्मानिर्भर पैकेज के तहत दिया गया है। हमने कृषि क्षेत्र में अपेक्षित निवेश को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।"

    एक मत-एक विचार, न संभव-न स्वीकार्य- शर्मा
    कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने सदन में बोलते हुए किसान आंदोलन का समर्थन किया। शर्मा ने कहा "प्रजातंत्र में एक मत हो, एक विचार हो ये ना संभव है ना स्वीकार्य है। भारत की परंपरा चर्चा और चिंतन की रही है। वाद-विवाद की संवाद की रही है। सरकार के हर निर्णय और नीति को जनता स्वीकार करे और विपक्ष उस पर सहमति दे, ये ना तो अनिवार्य है और ना ही स्वीकार्य है और यदि ऐसा हो तो हम जनतंत्र नहीं रहे।"

    बाजवा ने टाइमिंग पर उठाए सवाल
    पंजाब से कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने किसान आंदोलन पर बोलते हुए कानूनों को लाने की टाइमिंग पर सवाल किया। पंजाबी में अपना भाषण दे रहे बाजवा ने सवाल किया कि "जब कोरोना चल रहा था तो चोर दरवाजे से कृषि कानूनों को अध्यादेश के तौर पर लाने की क्या जरूरत थी ? जब इतने साल इंतजार किया तो छह महीने और इंतजार क्यों नहीं किया गया ?"

    अधीर रंजन चौधरी ने कसा तंज
    सांसद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट करने वालों पर भाजपा के हमले को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि, "हमारे कुछ राष्ट्रवादियों ने अमेरिका में 'अबकी बार, ट्रंप की सरकार' की बात की। इसका क्या मतलब था? जब हमने जॉर्ज फ्लॉयड के साथ हुई बदसलूकी का विरोध किया जो किसी ने सवाल नहीं किया. लेकिन जब रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग ने हमारे देश के किसानों साथ सद्भावना जतायी है तो हम इतना परेशान क्यों हो रहे हैं?"

    कंगना, अर्णब देशभक्त, किसान देशद्रोही- राउत
    शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि "लाल किले की घटना ने पूरे देश को दुखी किया। सवाल ये है कि जिस दीप सिद्धू ने ये सब किया उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। जबकि सैकड़ों किसानों को जेल में डालकर उनकर देशद्रोह का मुकदमा लगा दिया है।" राउत कंगना रनौत और अर्णब गोस्वामी का मुद्दा भी उठाया। कहा "जो भी सवाल उठाता है उसे गद्दार कह दिया जाता है। बस कंगना रनौत और अर्णब गोस्वामी ही देशप्रेमी हैं बाकी सब गद्दार हैं। किसान भी देशद्रोही हैं।"

    आठवले ने उठाया आरक्षण का मुद्दा
    रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया नेता और सांसद रामदास आठवले ने कृषि कानूनों पर चर्चा के दौरान आरक्षण का मुद्दा उठाया। मराठा, जाट, राजपूत और ठाकुर महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और यूपी में आरक्षण चाहते हैं। क्षत्रिय समुदाय की एक बड़ी आबादी है। जैसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण दिया गया था, वैसे ही उन्हें भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।

    डीएमके सांसद ने उठाया तमिल मछुआरों का मुद्दा
    कृषि कानूनों पर हो रही चर्चा के दौरान डीएमके सांसद शिवा ने श्रीलंका के साथ मछुआरों का मुद्दा उठाया। शिवा ने कहा कि "चार तमिल मछुआरों की मौत के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से श्रीलंका को सख्त संदेश देने की बात की है।" पिछले 23 जनवरी को चार तमिल मछुआरों की लाश मिली थी।

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